ट्रांसजेंडर कानून में बदलाव, स्व-पहचान प्रावधान हटाने पर विवाद
लोकसभा में ट्रांसजेंडर बिल पास, प्रियंका गांधी ने जताई चिंता
ट्रांसजेंडर कानून में बड़ा बदलाव, पहचान अब मेडिकल जांच के आधार पर
अरुण कुमार
नई दिल्ली, 26 मार्च 2026: लोकसभा ने मंगलवार को ध्वनि मत से ‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026’ को पारित कर दिया। यह विधेयक 2019 के मूल कानून में महत्वपूर्ण बदलाव लाता है, जिसे केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने 14 मार्च को पेश किया था। हालांकि सरकार इसे कमजोर वर्गों की सुरक्षा का कदम बता रही है, वहीं ट्रांसजेंडर समुदाय और विपक्ष ने इसे स्व-पहचान के अधिकारों पर हमला करार दिया है।

विधेयक का मुख्य उद्देश्य ट्रांसजेंडर परिभाषा को विस्तार देना है। इसमें किन्नर, हिजरा, अरावनी, जोगता, हिजड़ा जैसी सामाजिक-सांस्कृतिक पहचानों के साथ-साथ अंतरलिंगी भिन्नताओं, गुणसूत्र पैटर्न, जननांग विकास या हार्मोनल प्रतिक्रिया में जन्मजात अंतर वाले व्यक्तियों को शामिल किया गया है। साथ ही, मजबूरन लैंगिक पहचान अपनाने वाले व्यक्तियों के लिए सुरक्षा प्रावधान जोड़े गए हैं। लेकिन विवादास्पद रूप से, 2019 कानून के स्व-पहचान प्रावधान को हटा दिया गया है—अब ट्रांसजेंडर प्रमाण पत्र जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नामित प्राधिकारी की सिफारिश और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा जांच के आधार पर जारी होगा।
मंत्री वीरेंद्र कुमार ने सदन में कहा, “यह संशोधन जैविक स्थितियों से सामाजिक बहिष्कार झेलने वाले ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए मजबूत ढांचा बनाता है। हम उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।” हालांकि, देशभर में ट्रांसजेंडर कार्यकर्ताओं ने विधेयक का कड़ा विरोध किया। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में प्रदर्शन हुए, जहां कार्यकर्ताओं ने इसे ‘ट्रांसफोबिक’ बताया।
विपक्ष ने भी असहमति जताई। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, “यह विधेयक संसदीय स्थायी समिति को भेजे बिना पारित हो रहा है, जबकि व्यापक परामर्श जरूरी है। समुदाय के कुछ वर्गों को लगता है कि उनकी चिंताएं अनसुनी रह गईं।” अन्य विपक्षी दलों ने भी स्व-पहचान हटाने पर सवाल उठाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह विधेयक राज्यसभा में और बहस का विषय बनेगा। ट्रांसजेंडर अधिकार संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। सरकार का दावा है कि यह बदलाव दुरुपयोग रोकने के लिए है, लेकिन आलोचक इसे अधिकारों पर सरकारी नियंत्रण बता रहे हैं।
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