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IMEI से छेड़छाड़ पर सख्त कार्रवाई: 3 साल जेल और ₹50 लाख तक जुर्माना, जानें मोबाइल सुरक्षा के पूरे नियम

IMEI-Strict action against IMEI tampering: Up to 3 years in prison and a fine of up to ₹50 lakh; know the complete rules regarding mobile security.

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IMEI-भारत में 120.40 करोड़ से अधिक सक्रिय वायरलेस मोबाइल सब्सक्राइबर; सरकार ने सुरक्षित डिवाइस और IMEI की अखंडता पर दिया जोर

अरुण कुमार

नई दिल्ली

IMEI से छेड़छाड़ पर सख्त कार्रवाई: 3 साल जेल और ₹50 लाख तक जुर्माना, जानें मोबाइल सुरक्षा के पूरे नियम, भारत का डिजिटल इकोसिस्टम तेजी से विस्तार कर रहा है और मोबाइल फोन अब केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाओं, बैंकिंग, ई-गवर्नेंस और रोजमर्रा की कई आवश्यक सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। जुलाई 2026 में देश में सक्रिय वायरलेस मोबाइल सब्सक्राइबरों की संख्या 1,204.01 मिलियन यानी करीब 120.40 करोड़ तक पहुंच गई।

मोबाइल और दूरसंचार पर बढ़ती निर्भरता के बीच सरकार ने मोबाइल डिवाइस की पहचान और सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे IMEI के साथ छेड़छाड़ और उसके गैर-कानूनी इस्तेमाल को लेकर नागरिकों, निर्माताओं, आयातकों, विक्रेताओं और ब्रांड मालिकों की जिम्मेदारियों को रेखांकित किया है। सरकार के मुताबिक सुरक्षित और भरोसेमंद दूरसंचार व्यवस्था के लिए मोबाइल डिवाइस के पहचानकर्ता यानी IMEI की अखंडता बनाए रखना जरूरी है।

IMEI के साथ छेड़छाड़ क्या है?

सरकार के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर मोबाइल डिवाइस के IMEI को हटाता, मिटाता या बदलता है, तो यह गैर-कानूनी गतिविधि है। इसके अलावा ऐसे हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल, निर्माण, तस्करी, नियंत्रण या कब्जा रखना भी अपराध हो सकता है, जिसके बारे में संबंधित व्यक्ति को जानकारी हो कि उसे IMEI हटाने, मिटाने या बदलने के लिए कॉन्फिगर किया गया है।

IMEI क्या होता है?

IMEI यानी International Mobile Equipment Identity एक विशिष्ट 15 अंकों की पहचान संख्या है, जिसका इस्तेमाल मोबाइल नेटवर्क पर किसी मोबाइल डिवाइस की पहचान के लिए किया जाता है। सरल शब्दों में, IMEI मोबाइल फोन की एक विशिष्ट डिजिटल पहचान की तरह काम करता है।

TAC क्या है?

IMEI के शुरुआती 8 अंक Type Allocation Code यानी TAC होते हैं। TAC के जरिए मोबाइल डिवाइस के मॉडल या प्रकार की पहचान की जाती है।

IMEI कौन जारी करता है?

IMEI से जुड़े TAC के वैश्विक आवंटन की निगरानी GSMA यानी Global System for Mobile Communications Association द्वारा की जाती है। GSMA निर्माताओं और ब्रांड मालिकों को TAC आवंटित करता है। इसके बाद निर्माता अपने अलग-अलग डिवाइस को विशिष्ट IMEI नंबर प्रदान करते हैं।

डुअल सिम फोन में कितने IMEI होते हैं?

आमतौर पर Dual-SIM मोबाइल फोन में दो IMEI नंबर होते हैं। प्रत्येक SIM स्लॉट के लिए अलग IMEI हो सकता है। इसलिए यदि किसी फोन में दो SIM स्लॉट हैं, तो उपयोगकर्ता को दो अलग-अलग IMEI नंबर दिखाई दे सकते हैं।

अपना IMEI नंबर कैसे पता करें?

मोबाइल यूजर्स अपने फोन में: *#06#

डायल करके IMEI नंबर देख सकते हैं। यह जानकारी फोन की सेटिंग्स, डिवाइस पैकेजिंग या कुछ मामलों में बिल/डिवाइस दस्तावेजों में भी उपलब्ध हो सकती है।

IMEI को कैसे वेरिफाई करें?

सरकार ने नागरिकों के लिए संचार साथी (Sanchar Saathi) प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया है। इसके जरिए उपयोगकर्ता अपने मोबाइल डिवाइस की IMEI संबंधी जानकारी की जांच कर सकते हैं। यूजर डिवाइस के ब्रांड, मॉडल और निर्माता जैसी जानकारी को सत्यापित कर सकते हैं। इसके अलावा SMS के जरिए भी IMEI की जांच की जा सकती है। इसके लिए:

KYM <15 अंकों का IMEI नंबर> को 14422 पर भेजने का विकल्प उपलब्ध है।

निर्माताओं की क्या जिम्मेदारी है?

सरकार ने दूरसंचार उपकरणों की सुरक्षा के लिए निर्माताओं की जिम्मेदारियां भी तय की हैं। भारत में बनाए जाने वाले संबंधित दूरसंचार उपकरणों के IMEI नंबरों को पहली बिक्री, टेस्टिंग, रिसर्च या अन्य इस्तेमाल से पहले निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के तहत पंजीकृत करना होगा। यह प्रक्रिया Device Setu–Indian Counterfeited Device Restriction (ICDR) Portal के माध्यम से की जाती है।

निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके उपकरणों में-

  • सही IMEI नंबर हो।
  • IMEI विशिष्ट हो।
  • IMEI से छेड़छाड़ न की गई हो।
  • डिवाइस की पहचान अधिकृत तरीके से दर्ज हो।
आयातकों के लिए भी नियम

भारत में संबंधित दूरसंचार उपकरण आयात करने वाले आयातकों को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत IMEI नंबरों का पंजीकरण करना होगा। यह नियम बिक्री के लिए आयात किए गए उपकरणों के साथ-साथ टेस्टिंग, रिसर्च और डेवलपमेंट या अन्य उद्देश्यों के लिए लाए गए संबंधित उपकरणों पर भी लागू हो सकता है। आयातकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत में आने वाले उपकरणों पर सही और अधिकृत IMEI मौजूद हो।

रिटेलर्स और सेकेंड हैंड मोबाइल कारोबारियों की जिम्मेदारी

मोबाइल विक्रेताओं और रिटेलर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि बिक्री के लिए रखे गए मोबाइल और संबंधित दूरसंचार उपकरणों पर सही और बिना छेड़छाड़ वाले IMEI नंबर हों। वहीं इस्तेमाल किए गए मोबाइल उपकरणों का कारोबार करने वाले लोगों को लेन-देन पूरा करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार IMEI की जांच करनी चाहिए।

सरकारी केंद्रीय डेटाबेस में छेड़छाड़ किए गए और ब्लैकलिस्टेड डिवाइस की जानकारी उपलब्ध होती है। इसलिए सेकेंड हैंड मोबाइल खरीदते या बेचते समय IMEI की जांच महत्वपूर्ण है।

ब्रांड मालिकों की भी जिम्मेदारी

मोबाइल और दूरसंचार उपकरणों के ब्रांड मालिकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके ब्रांड के तहत बाजार में बेचे जा रहे उपकरण IMEI पंजीकरण और लागू साइबर सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करें। ब्रांड को निर्धारित पोर्टल पर पंजीकृत करने और संबंधित GSMA TAC से जोड़ने की प्रक्रिया का पालन करना होगा। साथ ही बाजार में उतारे जाने वाले उपकरणों में वास्तविक और अधिकृत IMEI नंबर सुनिश्चित करना होगा।

नागरिकों को किन चीजों से बचना चाहिए?

दूरसंचार विभाग ने नागरिकों से टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर और संसाधनों के दुरुपयोग से बचने की सलाह दी है।

1. छेड़छाड़ वाले IMEI डिवाइस से बचें

ऐसे मोबाइल, मॉडेम, मॉड्यूल, SIM बॉक्स या अन्य उपकरणों का इस्तेमाल, खरीद, असेंबल या कब्जा करने से बचना चाहिए जिनके IMEI के साथ छेड़छाड़ की गई हो या जिन्हें आसानी से कॉन्फिगर किया जा सकता हो।

2. फर्जी दस्तावेजों से SIM न लें

किसी अन्य व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करके या फर्जी दस्तावेजों, धोखाधड़ी या जालसाजी के जरिए SIM कार्ड हासिल करना कानून के दायरे में गंभीर मामला हो सकता है।

3. अपने नाम का SIM किसी और को न दें

अपने नाम पर जारी SIM कार्ड को दूसरे व्यक्ति को बेचना, हस्तांतरित करना या सौंपना जोखिमपूर्ण है। इसका गलत इस्तेमाल होने पर वास्तविक ग्राहक को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

4. CLI से छेड़छाड़ न करें

कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी यानी CLI या अन्य दूरसंचार पहचानकर्ताओं में बदलाव करने के लिए अनधिकृत मोबाइल ऐप, वेबसाइट या अन्य तरीकों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

संचार साथी से मोबाइल की सुरक्षा

Sanchar Saathi सरकार का ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसके जरिए नागरिक मोबाइल डिवाइस और मोबाइल कनेक्शन से जुड़ी कई सुरक्षा सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। IMEI वेरिफिकेशन के माध्यम से उपभोक्ता यह जांच सकते हैं कि उनके मोबाइल डिवाइस की पहचान संबंधी जानकारी उपलब्ध रिकॉर्ड से मेल खाती है या नहीं। मोबाइल खोने या चोरी होने की स्थिति में भी संचार साथी के CEIR सिस्टम के जरिए डिवाइस को ब्लॉक कराने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

मोबाइल चोरी हो जाए तो क्या करें?

यदि आपका मोबाइल फोन खो जाए या चोरी हो जाए तो सरकार की ओर से बताए गए क्रम में कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है।

पहला कदम: पुलिस में शिकायत

सबसे पहले स्थानीय पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराएं और शिकायत की एक कॉपी अपने पास रखें।

दूसरा कदम: डुप्लीकेट SIM लें

अपने दूरसंचार ऑपरेटर से खोए हुए नंबर के लिए डुप्लीकेट SIM प्राप्त करें। सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार दोबारा जारी किए गए SIM के एक्टिवेशन के बाद शुरुआती 24 घंटों में SMS सेवाओं पर प्रतिबंध लागू रहता है। संचार साथी पर मोबाइल OTP सत्यापन की जरूरत होने के कारण अनुरोध जमा करने से पहले निर्धारित अवधि का इंतजार करना पड़ सकता है।

तीसरा कदम: CEIR पर ब्लॉक रिक्वेस्ट

इसके बाद संचार साथी (CEIR) पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए चोरी या खोए हुए मोबाइल को ब्लॉक करने का अनुरोध दर्ज किया जा सकता है। इसके लिए पुलिस शिकायत और वैध पहचान दस्तावेज जैसी जानकारी मांगी जा सकती है। अनुरोध स्वीकार होने के बाद उपयोगकर्ता को एक Request ID मिलती है।

चौथा कदम: मोबाइल मिल जाए तो अनब्लॉक करें

यदि चोरी या खोया हुआ मोबाइल बाद में मिल जाता है तो पहले स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी दें और उसके बाद अपनी Request ID का इस्तेमाल करके डिवाइस को सुरक्षित तरीके से अनब्लॉक करने की प्रक्रिया पूरी करें।

IMEI से छेड़छाड़ पर क्या है कानूनी प्रावधान?

भारत में दूरसंचार क्षेत्र की सुरक्षा के लिए Telecommunications Act, 2023 में भी प्रावधान किए गए हैं। सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार-

  • धारा 42(3)(c) टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर के साथ छेड़छाड़ पर रोक लगाती है।
  • धारा 42(3)(e) धोखाधड़ी, जालसाजी या किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण करके SIM या टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर हासिल करने से संबंधित है।
  • उल्लंघन के मामले में तीन वर्ष तक की जेल, ₹50 लाख तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान बताया गया है।
  • धारा 42(7) के तहत ऐसे अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती हो सकते हैं।
  • धारा 42(6) के तहत अपराध में सहायता या उकसाने वालों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।

इसलिए IMEI में जानबूझकर बदलाव करना केवल तकनीकी छेड़छाड़ का मामला नहीं है, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार कानूनी कार्रवाई का आधार भी बन सकता है।

मोबाइल खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

नया या सेकेंड हैंड मोबाइल खरीदते समय कुछ बुनियादी सावधानियां बरतना जरूरी है-

✔ अधिकृत विक्रेता से मोबाइल खरीदें।

✔ फोन का IMEI नंबर जांचें।

✔ *#06# डायल करके IMEI देखें।

✔ संचार साथी पर उपलब्ध IMEI जानकारी को सत्यापित करें।

✔ सेकेंड हैंड फोन खरीदते समय IMEI और डिवाइस की स्थिति जांचें।

✔ बिल और खरीद संबंधी दस्तावेज सुरक्षित रखें।

✔ मोबाइल में मजबूत PIN, पासवर्ड या बायोमेट्रिक लॉक लगाएं।

✔ मरम्मत के लिए अधिकृत सर्विस सेंटर का इस्तेमाल करें।

क्यों जरूरी है IMEI की सुरक्षा?

भारत में 120 करोड़ से अधिक सक्रिय वायरलेस मोबाइल सब्सक्राइबरों के साथ मोबाइल नेटवर्क देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। यदि डिवाइस की पहचान से छेड़छाड़ होती है तो नेटवर्क पर डिवाइस की सही पहचान मुश्किल हो सकती है। इससे कानून लागू करने वाली एजेंसियों, नेटवर्क ऑपरेटरों और उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। ऐसे में IMEI की अखंडता बनाए रखना मोबाइल डिवाइस के निर्माण से लेकर उसके इस्तेमाल और सेकेंड हैंड बिक्री तक पूरे लाइफसाइकिल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

डिजिटल भारत के लिए सुरक्षित डिवाइस क्यों जरूरी?

भारत में डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन बैंकिंग, सरकारी सेवाओं, ई-कॉमर्स और मोबाइल आधारित सेवाओं का विस्तार लगातार हो रहा है। ऐसे में सुरक्षित मोबाइल डिवाइस केवल व्यक्तिगत सुरक्षा का विषय नहीं है, बल्कि पूरे डिजिटल इकोसिस्टम की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। सरकार, मोबाइल निर्माता, आयातक, ब्रांड, रिटेलर और उपभोक्ता—सभी की भूमिका मिलकर एक सुरक्षित और भरोसेमंद दूरसंचार व्यवस्था तैयार करती है।

सरकार का जोर है कि जागरूकता, IMEI वेरिफिकेशन, कानूनों का पालन और जिम्मेदार मोबाइल इस्तेमाल के जरिए डिवाइस की सुरक्षा को मजबूत किया जाए।

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Ib News
Author: Ib News

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