ग्रामीण युवाओं के लिए बड़ा मौका: DDU-GKY 2.0 में ट्रेनिंग से लेकर नौकरी और करियर सपोर्ट तक
अरुण कुमार
नई दिल्ली
DDU-GKY 2.0: ग्रामीण युवाओं को कौशल से रोजगार तक, 18.47 लाख प्रशिक्षित और 12.43 लाख से अधिक प्लेसमेंट, भारत की युवा आबादी देश की आर्थिक प्रगति और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की बड़ी क्षमता रखती है। अनुमान के अनुसार वर्ष 2036 तक देश में युवाओं की आबादी करीब 34.5 करोड़ हो सकती है। इस जनसांख्यिकीय क्षमता को रोजगार और आर्थिक अवसरों में बदलने के लिए गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और सतत आजीविका के अवसरों तक पहुंच बढ़ाना महत्वपूर्ण है।
इसी उद्देश्य से ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत संचालित दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (DDU-GKY) ग्रामीण गरीब परिवारों के युवाओं को रोजगार से जुड़े कौशल प्रशिक्षण और प्लेसमेंट के अवसर उपलब्ध करा रही है। योजना की शुरुआत 25 सितंबर 2014 को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत की गई थी। योजना के 12वें वर्ष में प्रवेश के साथ अब DDU-GKY 2.0 के माध्यम से प्रशिक्षण के साथ-साथ रोजगार की निरंतरता, पोस्ट-प्लेसमेंट सहायता, करियर प्रगति और प्रवासन सहायता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

क्या है DDU-GKY?
दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना ग्रामीण गरीब परिवारों के 15 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को रोजगार से जुड़े कौशल का प्रशिक्षण देने वाली प्रमुख ग्रामीण कौशल विकास योजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य केवल युवाओं को प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रदान कर रोजगार से जोड़ना और रोजगार मिलने के बाद भी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। योजना सामाजिक समावेशन पर भी जोर देती है। इसके तहत:
- 50 प्रतिशत कवरेज SC/ST समुदायों के लिए निर्धारित है।
- 33 प्रतिशत कवरेज महिलाओं के लिए है।
- 5 प्रतिशत कवरेज दिव्यांगजनों के लिए निर्धारित है। इससे ग्रामीण कौशल विकास में वंचित और कमजोर वर्गों की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।
DDU-GKY 2.0 में क्या बदला?
सरकार ने मई 2025 में DDU-GKY 2.0 के संशोधित दिशानिर्देश अधिसूचित किए। संशोधित व्यवस्था में प्रशिक्षण और प्लेसमेंट के साथ रोजगार स्थिरता और पोस्ट-प्लेसमेंट सहायता को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है। DDU-GKY 2.0 में उद्योग की मांग के आधार पर कई क्षेत्रों में प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। इनमें
- एयरोस्पेस और विमानन
- कृषि
- सौंदर्य एवं कल्याण
- हरित रोजगार
- स्वास्थ्य सेवा
- वस्त्र
- अन्य उद्योग-आधारित रोजगार क्षेत्र शामिल हैं। केंद्रीय बजट 2026-27 में DDU-GKY के लिए 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

प्रशिक्षण से रोजगार तक का नया मॉडल
DDU-GKY 2.0 में कौशल विकास को केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें उम्मीदवार की पूरी रोजगार यात्रा को ध्यान में रखा गया है। इसमें-
प्रशिक्षण → प्लेसमेंट → रोजगार निरंतरता → पोस्ट-प्लेसमेंट सहायता → कौशल उन्नयन → करियर प्रगति शामिल हैं। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य युवाओं को केवल नौकरी दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार में टिके रहने और आगे बढ़ने में सहायता करना है।
न्यूनतम 576 घंटे का प्रशिक्षण
DDU-GKY 2.0 के तहत न्यूनतम 576 घंटे का प्रशिक्षण ढांचा रखा गया है। तीन महीने के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में 396 घंटे डोमेन प्रशिक्षण, 180 घंटे अनिवार्य गैर-डोमेन प्रशिक्षण शामिल हैं।
गैर-डोमेन प्रशिक्षण को चार प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है:
| प्रशिक्षण | घंटे |
|---|---|
| अंग्रेजी संचार | 60 घंटे |
| रोजगारपरकता एवं जीवन कौशल | 60 घंटे |
| कंप्यूटर एवं डिजिटल साक्षरता | 30 घंटे |
| उद्यमिता | 30 घंटे |
| कुल | 180 घंटे |

इस व्यवस्था का उद्देश्य युवाओं को तकनीकी कौशल के साथ संचार, डिजिटल क्षमता, कार्यस्थल व्यवहार और उद्यमिता की बुनियादी समझ देना है।
प्लेसमेंट की न्यूनतम अवधि बढ़कर 6 महीने
DDU-GKY में पहले प्लेसमेंट को कम से कम तीन महीने के निरंतर रोजगार के रूप में देखा जाता था। DDU-GKY 2.0 में न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि बढ़ाकर छह महीने की गई है। संशोधित ढांचे में निरंतर और गैर-निरंतर रोजगार दोनों को शामिल किया गया है। इसमें वेतन रोजगार, स्वरोजगार और गिग रोजगार जैसे विकल्पों को भी शामिल किया गया है।
रोजगार बनाए रखने पर आर्थिक सहायता
DDU-GKY 2.0 में रोजगार मिलने के बाद उम्मीदवारों की स्थिति पर भी निगरानी और सहायता का प्रावधान है। प्लेस किए गए उम्मीदवारों को छह महीने तक 1,270 रुपये प्रति माह, यानी कुल 7,620 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। इसके अलावा, जो उम्मीदवार 365 दिनों तक रोजगार में बने रहते हैं, उन्हें प्रति उम्मीदवार 5,000 रुपये की रिटेंशन सहायता का प्रावधान है। इसमें अधिकतम 60 दिनों के रोजगार ब्रेक की अनुमति बताई गई है। 12 महीने बाद उम्मीदवारों के लिए कौशल बढ़ाने और पुनर्कौशल के अवसर भी उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार मेले
ग्रामीण युवाओं को सीधे संभावित नियोक्ताओं से जोड़ने के लिए राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) द्वारा ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर रोजगार मेले आयोजित किए जाते हैं। इन मेलों में युवाओं का पंजीकरण, कौशल के आधार पर परामर्श, नियोक्ताओं का सत्यापन और उम्मीदवारों और कंपनियों के बीच संपर्क तथा प्लेसमेंट परिणामों की निगरानी जैसी गतिविधियां शामिल हैं। DDU-GKY बजट से ग्राम पंचायत स्तर के मेले के लिए 50,000 रुपये तक और ब्लॉक स्तर के मेले के लिए 1 लाख रुपये तक वित्तीय सहायता का प्रावधान है। यह सहायता क्रमशः 100 और 200 उम्मीदवारों की नियुक्ति से जुड़ी है।
प्रवासन सहायता केंद्रों से युवाओं को मदद
ग्रामीण युवाओं के रोजगार के लिए दूसरे शहरों और राज्यों में जाने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए DDU-GKY 2.0 में Migration Support Centres (MSC) को मजबूत किया गया है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन उन क्षेत्रों में प्रवासन सहायता केंद्र स्थापित करते हैं जहां प्रशिक्षित उम्मीदवारों की संख्या अधिक होती है। ये केंद्र उम्मीदवारों को आवास संबंधी सहायता, परामर्श, रोजगार एवं प्लेसमेंट सहायता और रोजगार संबंधी जानकारी तथा पूर्व छात्रों के नेटवर्क से जुड़ने व नियोक्ताओं से संपर्क जैसी सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। नए ढांचे में प्रत्येक MSC के लिए वार्षिक वित्तीय सहायता को पहले के 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये तक किया गया है।
विशेष पहल: रोशनी
DDU-GKY 2.0 के तहत संवेदनशील क्षेत्रों के लिए विशेष पहल भी लागू की जा रही हैं। रोशनी कार्यक्रम गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित जिलों की विशेष जरूरतों पर केंद्रित है। इसके तहत महिला उम्मीदवारों के लिए 40 प्रतिशत कवरेज के साथ आवासीय कौशल प्रशिक्षण का प्रावधान है। इस पहल का विस्तार आकांक्षी जिलों तक भी किया गया है, जहां स्थानीय जरूरतों के अनुसार-बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य, और प्राकृतिक संसाधन व पारंपरिक कौशल जैसे क्षेत्रों को ध्यान में रखा जाता है।

हिमायत: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के युवाओं के लिए विशेष योजना
हिमायत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए विशेष DDU-GKY योजना है। यह योजना ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के युवाओं को कवर करती है तथा इसमें BPL और APL दोनों वर्गों के लोगों को शामिल किया गया है। हिमायत के तहत- वेतन रोजगार, स्वरोजगार और गिग रोजगार के अवसरों को समर्थन दिया जाता है। यह योजना 100 प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित है और समर्पित मिशन प्रबंधन इकाइयों के माध्यम से लागू की जाती है।
पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 10 प्रतिशत आवंटन
पूर्वोत्तर राज्यों की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों और सामाजिक-सांस्कृतिक विशेषताओं को देखते हुए DDU-GKY के कुल आवंटन में से 10 प्रतिशत हिस्सा पूर्वोत्तर राज्यों के लिए निर्धारित किया गया है। दुर्गम क्षेत्रों में काम करने वाली परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों के लिए विशेष क्षेत्र भत्ते का भी प्रावधान है। इन क्षेत्रों में प्रति उम्मीदवार आधार प्रशिक्षण लागत के अतिरिक्त 10 प्रतिशत तक भुगतान का प्रावधान बताया गया है।
तकनीक से मजबूत हो रहा DDU-GKY
DDU-GKY में शुरुआत से ही तकनीक का इस्तेमाल निगरानी और प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया जाता रहा है।इसमें जियो-टैगिंग, टाइम-स्टैम्प्ड बायोमेट्रिक उपस्थिति और कंप्यूटर लैब तथा ई-लर्निंग सुविधाएं शामिल हैं।
DDU-GKY 2.0 में इसे और व्यापक डिजिटल सिस्टम से जोड़ा गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म में PIA ऑनबोर्डिंग, परियोजना सबमिशन एवं मूल्यांकन, प्रशिक्षण केंद्र प्रबंधन, उम्मीदवार प्रबंधन, मूल्यांकन एवं प्रमाणन, वित्तीय प्रबंधन और परियोजना निगरानी व प्लेसमेंट ट्रैकिंग जैसी प्रक्रियाएं शामिल की गई हैं।
डिजिटल निगरानी और फेस ऑथेंटिकेशन
संशोधित व्यवस्था में कार्यक्रम की निगरानी के लिए रियल-टाइम डैशबोर्ड उपलब्ध कराया गया है। साथ ही सार्वजनिक उम्मीदवार पोर्टल, PIA प्रदर्शन रेटिंग, स्वचालित PRN निर्माण, शिकायत निवारण, प्रमाणपत्र सत्यापन, फेस ऑथेंटिकेशन और डिजिटल उपस्थिति तथा रियल-टाइम मूल्यांकन डैशबोर्ड जैसी सुविधाओं को शामिल किया गया है। Skill India Digital Hub के साथ एकीकरण के जरिए पाठ्यक्रम विवरण के स्वचालित सत्यापन की व्यवस्था भी प्रस्तावित/लागू ढांचे का हिस्सा है।
2025-26 में राज्यों की प्रगति
DDU-GKY 2.0 के कार्यान्वयन में कुछ राज्यों ने शुरुआती चरण में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। गोवा DDU-GKY 2.0 के बैच शुरू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। आंध्र प्रदेश ने तीन महीने की अवधि में 12,000 से अधिक उम्मीदवारों का प्रशिक्षण शुरू किया। जम्मू-कश्मीर ने अपने आवंटित लक्ष्य का 100 प्रतिशत प्राप्त किया और 91 प्रतिशत आवंटन के लिए प्रशिक्षण शुरू किया।
31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में योजना का विस्तार
DDU-GKY वर्तमान में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार योजना के तहत 455 से अधिक PIA, 760 सक्रिय प्रशिक्षण केंद्र और 749 अनुमोदित परियोजनाएं कार्यरत हैं।

18.47 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण
वर्ष 2014-15 में योजना की शुरुआत से अब तक 18.47 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें अर्थव्यवस्था के 36 सेक्टर और 800 से अधिक रोजगार भूमिकाएं शामिल हैं। इनमें से 12.43 लाख से अधिक उम्मीदवारों का प्लेसमेंट किया गया है। यह आंकड़े ग्रामीण युवाओं को उद्योग से जुड़े कौशल और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में योजना के व्यापक दायरे को दर्शाते हैं।
महिलाओं की भागीदारी भी मजबूत
DDU-GKY में महिलाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार- 9.71 लाख से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया। 6.34 लाख से अधिक महिलाओं का प्लेसमेंट हुआ। महिलाओं के लिए निर्धारित 33 प्रतिशत कवरेज का उद्देश्य ग्रामीण महिला युवाओं को आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों से जोड़ना है।
RSETI के जरिए ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार
जहां DDU-GKY मुख्य रूप से रोजगार से जुड़े कौशल और प्लेसमेंट पर केंद्रित है, वहीं सरकार Rural Self Employment Training Institutes (RSETIs) के जरिए ग्रामीण युवाओं के स्वरोजगार और उद्यमिता को भी बढ़ावा दे रही है। RSETI कार्यक्रम के तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग के ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को नि:शुल्क आवासीय प्रशिक्षण दिया जाता है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण के बाद युवाओं को स्थायी स्वरोजगार स्थापित करने में सहायता देना है।
यह कार्यक्रम विशेष रूप से-ग्रामीण बेरोजगार युवा, BPL परिवार और DAY-NRLM परिवारों के सदस्यों के कौशल विकास पर ध्यान देता है।
647 RSETI केंद्रों के जरिए प्रशिक्षण
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश के 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 634 जिलों में 647 RSETI संचालित हैं। वर्ष 2009 में शुरुआत के बाद से RSETI के माध्यम से 63.47 लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षण दिया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार प्रशिक्षित उम्मीदवारों में लगभग 94 प्रतिशत ने स्थायी स्वरोजगार उद्यम स्थापित किए, जबकि लगभग 6 प्रतिशत ने मजदूरी रोजगार प्राप्त किया।
ग्रामीण भारत के भविष्य के लिए कौशल पर जोर
ग्रामीण युवाओं की कौशल क्षमता, रोजगार योग्यता और उद्यमिता को मजबूत करना समावेशी आर्थिक विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। DDU-GKY 2.0 में प्रशिक्षण के साथ-साथ रोजगार में बने रहने, कौशल उन्नयन, प्रवासन सहायता और डिजिटल निगरानी पर जोर दिया गया है। योजना का व्यापक उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों के युवाओं को ऐसे कौशल उपलब्ध कराना है जो उन्हें रोजगार के बदलते बाजार से जोड़ सकें।
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Deen dayal upadhyay