Search
Close this search box.

CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग: CJP ने दी 48 घंटे की डेडलाइन, SIR विवाद के बीच देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

Demand for CEC Gyanesh Kumar's resignation: CJP sets 48-hour deadline; warns of nationwide agitation amidst the SIR controversy.

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

IB NEWS

नई दिल्ली

CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग: CJP ने दी 48 घंटे की डेडलाइन, SIR विवाद के बीच देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी, Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए उन्हें 48 घंटे का समय दिया है। नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिपके ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली ने मत देने के अधिकार को प्रभावित किया है और मतदाता सूची में हेरफेर की जा रही है।

दिपके ने चेतावनी दी कि यदि 48 घंटे के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो CJP देशभर में आंदोलन शुरू करेगी। पार्टी ने कहा है कि प्रस्तावित आंदोलन जून में दिल्ली के जंतर-मंतर पर किए गए उसके प्रदर्शन की तर्ज पर होगा।

महत्वपूर्ण: मतदाता सूची में हेरफेर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगाए गए आरोप CJP और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके के दावे हैं। इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। चुनाव आयोग ने दूसरी ओर SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मत बताया है।

48 घंटे में इस्तीफा नहीं तो देशव्यापी आंदोलन

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दिपके ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं दिया गया तो Cockroach Janta Party देशभर में आंदोलन शुरू करेगी और जब तक ज्ञानेश कुमार पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रखने की बात कही। CJP ने अपने प्रस्तावित आंदोलन को जून में जंतर-मंतर पर हुए अपने प्रदर्शन से जोड़ते हुए कहा है कि इस बार आंदोलन का दायरा देशव्यापी होगा।

SIR विवाद के बीच सामने आई इस्तीफे की मांग

अभिजीत दिपके की यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची के प्रबंधन को लेकर सार्वजनिक बहस चल रही है।

23 सितंबर को प्रकाशित एक Indian Express जांच रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं को जोड़ने, नाम हटाने और बहाल करने, Form 6 में बदलाव तथा मतदाता डेटा के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

रिपोर्ट के अनुसार कुछ आपत्तियां एक ही दिन में कई बार दर्ज की गई थीं और चुनावी डेटाबेस तक पहुंच तथा उसके प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।

Form 6 और मतदाता डेटा को लेकर क्या सवाल उठे?

रिपोर्टों के अनुसार दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों में Form 6 से जुड़े बदलाव भी शामिल थे। Form 6 का इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए किया जाता है। इसके अलावा चुनावी डेटा और डिजिटल सिस्टम के संचालन को लेकर भी आपत्तियों का उल्लेख रिपोर्टों में हुआ है। Indian Express के अनुसार कुछ मामलों में मतदाता डेटाबेस तक पहुंच के केंद्रीकरण और स्थानीय चुनाव अधिकारियों की भूमिका से संबंधित चिंताएं सामने आई थीं।

यह पूरा विवाद इसलिए महत्वपूर्ण हो गया क्योंकि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधित करने की प्रक्रिया सीधे मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी भागीदारी से जुड़ी होती है।

क्या चुनाव आयोग में मतभेद हैं?

दो चुनाव आयुक्तों द्वारा आपत्तियां दर्ज किए जाने की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर चर्चा तेज हुई। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस व्याख्या को स्वीकार नहीं किया कि अलग-अलग टिप्पणियां या आपत्तियां तीन सदस्यीय आयोग में किसी संस्थागत विभाजन का प्रमाण हैं।

चुनाव आयोग के पक्ष के अनुसार अलग-अलग राय, लिखित टिप्पणियां और आंतरिक जांच किसी भी संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग ने कहा कि SIR सहित उसके निर्णय तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए।

14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद आयोग का पक्ष

रिपोर्टों में सामने आई 14 आपत्तियों के बाद चुनाव आयोग की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि इन आपत्तियों को अंतिम निर्णयों से असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

Media रिपोर्ट के अनुसार आयोग के सूत्रों ने कहा कि SIR सहित सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी। आयोग ने यह भी कहा कि कुछ मुद्दों पर अधिकारियों द्वारा चिंताएं या टिप्पणियां दर्ज की गई थीं, लेकिन अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। इस तरह मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने आते हैं—एक तरफ रिपोर्टों में दर्ज आपत्तियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ चुनाव आयोग इन घटनाओं को सामान्य आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा बता रहा है।

CJP ने चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल

CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसलों का सीधा संबंध नागरिकों के मताधिकार से है। दिपके ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि कौन मतदाता सूची में शामिल रहेगा और किसका नाम हटाया जाएगा।

CJP की अन्य मांगें भी सामने आईं

India Today की 24 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार CJP ने केवल CEC के इस्तीफे की मांग ही नहीं की, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों को फिलहाल स्थगित करने और SIR को 2025 की स्थिति पर वापस ले जाने की मांग भी उठाई। इससे स्पष्ट है कि पार्टी का विरोध केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के पद तक सीमित नहीं है, बल्कि वह चुनावी सूची के संशोधन और आगामी चुनावी प्रक्रिया को लेकर व्यापक बदलाव की मांग कर रही है।

जून के जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा आंदोलन

CJP ने अपने प्रस्तावित देशव्यापी आंदोलन की तुलना जून में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से की है। पार्टी का कहना है कि यदि 48 घंटे की समयसीमा में CEC की ओर से इस्तीफा नहीं दिया जाता है तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाया जाएगा।

मतदाता सूची और लोकतंत्र का सवाल

मतदाता सूची किसी भी चुनावी प्रक्रिया का बुनियादी हिस्सा होती है। इसलिए मतदाता नाम जोड़ने, हटाने, सुधारने और पुनर्स्थापित करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निर्धारित नियमों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है। SIR को लेकर चल रही बहस में भी यही मुद्दा प्रमुख है कि पात्र मतदाताओं का नाम सूची में बना रहे और अपात्र या गलत प्रविष्टियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत हटाया जाए।

ऐसे मामलों में किसी भी आरोप या आपत्ति का आकलन आधिकारिक रिकॉर्ड, कानूनी प्रावधानों और चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर किया जाना आवश्यक है।

चुनाव आयोग के सामने चुनौती

SIR को लेकर उठे सवालों और CJP की ताजा घोषणा के बीच चुनाव आयोग के सामने मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया को लेकर सार्वजनिक विश्वास और पारदर्शिता बनाए रखने की चुनौती महत्वपूर्ण बनी हुई है। दूसरी ओर, आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसके निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं और अलग-अलग आंतरिक टिप्पणियों को आयोग के भीतर विभाजन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

आगे क्या होगा?

अब सभी की नजरें CJP की 48 घंटे की समयसीमा और उसके बाद घोषित किए जाने वाले संभावित आंदोलन पर हैं। यदि CJP अपने घोषित कार्यक्रम के अनुसार देशव्यापी आंदोलन शुरू करती है, तो यह मुद्दा मतदाता सूची, SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चल रही सार्वजनिक बहस को और व्यापक कर सकता है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग CJP की राजनीतिक मांग है, जबकि चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को सर्वसम्मत बताया है। 14 आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट और आयोग की प्रतिक्रिया—दोनों को साथ रखकर ही पूरे विवाद को समझा जा सकता है। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड, चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं और उपलब्ध तथ्यों को देखना जरूरी होगा।

#GyaneshKumar #AbhijeetDipke #CJP #CockroachJantaParty #ElectionCommission #SIR #SIRControversy #VoterList #ElectoralRoll #ElectionNews #IndianDemocracy #DelhiNews #BreakingNews #IndiaNews

Ib News
Author: Ib News

2 thoughts on “CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग: CJP ने दी 48 घंटे की डेडलाइन, SIR विवाद के बीच देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी”

Leave a Comment

और पढ़ें