अरुण कुमार
नई दिल्ली।
CII Big Picture summit 2026: भारत के मीडिया-एंटरटेनमेंट सेक्टर को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का रोडमैप, भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने मीडिया और मनोरंजन उद्योग से केवल अपने कारोबार का विस्तार करने के बजाय मौलिक बौद्धिक संपदा (IP), टिकाऊ बिजनेस मॉडल और वैश्विक बाजारों में अपनी मजबूत उपस्थिति विकसित करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि भारत के पास अपनी समृद्ध कहानी कहने की परंपरा, सांस्कृतिक विविधता, रचनात्मक प्रतिभा और आधुनिक तकनीक के दम पर दुनिया के प्रमुख मीडिया एवं मनोरंजन केंद्रों में शामिल होने का बड़ा अवसर है।
चंचल कुमार नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय CII बिग पिक्चर समिट 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस वर्ष समिट की थीम “द न्यू इकोनॉमिक्स ऑफ मीडिया एंड एंटरटेनमेंट: बिल्डिंग इंडियाज फ्यूचर ग्लोबल मीडिया कंपनीज” रखी गई है। इसमें मीडिया और मनोरंजन उद्योग के भविष्य, बदलते कारोबारी मॉडल, डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), निवेश और भारतीय कंपनियों के वैश्विक विस्तार पर चर्चा की गई।

‘क्रिएट इन इंडिया, क्रिएट फॉर द वर्ल्ड’ के विजन पर जोर
चंचल कुमार ने समिट की थीम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के WAVES 2025 में प्रस्तुत विजन “क्रिएट इन इंडिया, क्रिएट फॉर द वर्ल्ड” से जोड़ते हुए कहा कि भारत को अपनी रचनात्मक क्षमता को दीर्घकालिक आर्थिक और सांस्कृतिक मूल्य में बदलने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय मीडिया कंपनियों को केवल दर्शकों की संख्या और कारोबार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें ऐसे मौलिक कंटेंट, बौद्धिक संपदा और व्यावसायिक मॉडल विकसित करने चाहिए, जो लंबे समय तक बाजार में अपनी पहचान बनाए रखें और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। इस दृष्टिकोण के तहत भारतीय कहानियों, फिल्मों, डिजिटल कंटेंट, गेमिंग, एनीमेशन और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में मौजूद संभावनाओं को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
WAVES, WAVES बाजार और IICT जैसी पहलों पर चर्चा
मंत्रालय के सचिव ने भारत के क्रिएटिव इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए सरकार की ओर से की जा रही पहलों का उल्लेख किया। इनमें WAVES, WAVES बाजार, भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) और इंडिया सिने हब जैसी पहल शामिल हैं।इन पहलों का व्यापक उद्देश्य रचनात्मक उद्योगों को प्रोत्साहन देना, प्रतिभाओं और कारोबारों को अवसर उपलब्ध कराना तथा भारतीय मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। चंचल कुमार ने रचनात्मकता की सुरक्षा के लिए मजबूत एंटी-पायरेसी व्यवस्था की जरूरत भी रेखांकित की। पायरेसी के कारण कंटेंट निर्माताओं, कलाकारों, प्रोडक्शन कंपनियों और अन्य अधिकारधारकों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। ऐसे में बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा और वैध डिजिटल वितरण व्यवस्था को मजबूत करना उद्योग के दीर्घकालिक विकास के लिए अहम है।
उन्होंने इस दिशा में एक स्पष्ट विजन पर जोर दिया—“क्रिएट इन इंडिया, ओन इन इंडिया, स्केल फ्रॉम इंडिया, टेक इट टू द वर्ल्ड।” यानी भारत में निर्माण, भारत में बौद्धिक संपदा का स्वामित्व, भारत से कारोबार का विस्तार और फिर वैश्विक बाजारों तक पहुंच।
2030 के शुरुआती वर्षों तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य
समिट के दौरान कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) की श्वेत पत्र रिपोर्ट “द न्यू इकोनॉमिक्स ऑफ मीडिया एंड एंटरटेनमेंट” भी जारी की गई। इसमें भारत के मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र को 2030 के शुरुआती वर्षों तक 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचाने के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट में उद्योग के विकास को गति देने के लिए तेजी से सुधार लागू करने, क्षेत्रीय बाजारों को मजबूत बनाने और सरकारी योजनाओं तथा पहलों के क्रियान्वयन में मापने योग्य परिणाम सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
भारत में विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों के दर्शकों की मौजूदगी मीडिया कंपनियों के लिए एक बड़ा अवसर है। क्षेत्रीय कंटेंट, स्थानीय कहानियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार से नए दर्शक वर्ग तक पहुंचने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही, भारतीय कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी सामग्री और सेवाओं का विस्तार करना भी महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, 100 अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल करने के लिए केवल बाजार का आकार बढ़ना पर्याप्त नहीं होगा। कंपनियों को मजबूत राजस्व मॉडल, मौलिक कंटेंट, प्रभावी वितरण व्यवस्था और निवेश के बेहतर उपयोग पर भी ध्यान देना होगा।

गौरव बनर्जी बोले—सिर्फ बड़ा दर्शक वर्ग बिजनेस मॉडल नहीं
समिट के अध्यक्ष और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के एमडी एवं सीईओ गौरव बनर्जी ने मीडिया उद्योग में कारोबारी मॉडल को बुनियादी रूप से बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एक बड़ा दर्शक वर्ग होना सिर्फ एक शुरुआत है, यह अपने आप में कोई बिजनेस मॉडल नहीं है।”
उनके अनुसार, मीडिया कंपनियों को यह समझना होगा कि दर्शकों को किस प्रकार का मूल्य मिल रहा है, विज्ञापनदाताओं को उनके निवेश से क्या ठोस परिणाम हासिल हो रहे हैं और निवेशकों को लगातार बेहतर रिटर्न किस तरह दिया जा सकता है। यह दृष्टिकोण ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब डिजिटल प्लेटफॉर्म, स्ट्रीमिंग सेवाओं और ऑनलाइन वीडियो के विस्तार के साथ मीडिया कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। केवल अधिक व्यूज या बड़ी पहुंच के बजाय दर्शकों की भागीदारी, कंटेंट की गुणवत्ता, विज्ञापन प्रभावशीलता और आर्थिक स्थिरता पर ध्यान देना जरूरी होता जा रहा है।
AI और डिजिटल तकनीक से क्रिएटर्स को मिलेंगे नए अवसर
समिट की सह-अध्यक्ष और YouTube India की कंट्री मैनेजिंग डायरेक्टर गुंजन सोनी ने रचनात्मकता और संस्कृति को भारत के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को गति देने वाली आर्थिक शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युवा क्रिएटर्स को अपनी कल्पना और स्थानीय पहचान को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले उद्यमों में बदलने में मदद कर सकते हैं।
AI आधारित उपकरणों के माध्यम से कंटेंट तैयार करने, संपादन, अनुवाद, स्थानीयकरण और विभिन्न भाषाओं के दर्शकों तक पहुंच बनाने के नए रास्ते खुल सकते हैं। इससे छोटे क्रिएटर्स और उभरते उद्यमों को भी व्यापक बाजार तक पहुंचने के अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, इस अवसर का लाभ उठाने के लिए रचनात्मक स्वतंत्रता, मौलिकता, बौद्धिक संपदा अधिकारों और भरोसे को बनाए रखना भी जरूरी होगा।
राजन नवानी ने AI तक व्यापक पहुंच को बताया जरूरी
समिट के सह-अध्यक्ष और जेटसिंथेसिस के एमडी एवं सीईओ राजन नवानी ने कहा कि वैश्विक बदलावों के साथ तालमेल बिठाने के लिए तकनीक और AI तक व्यापक पहुंच जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानी कल्पना और विचारों को वास्तविक उत्पादों एवं सेवाओं में बदलने के बीच की दूरी को तेजी से कम कर रहा है।

मीडिया और मनोरंजन उद्योग में इसका प्रभाव कंटेंट निर्माण, गेमिंग, डिजिटल अनुभव, वितरण और नए कारोबारी अवसरों पर दिखाई दे सकता है। तकनीक की सुलभता से स्टार्टअप, स्वतंत्र क्रिएटर्स और छोटे उद्यमों को भी नए प्रयोग करने का अवसर मिल सकता है।
WAVEX और WAVES बाजार के प्रतिभागियों को निवेशकों से जोड़ा
चंचल कुमार ने WAVES ग्लोबल इन्वेस्टर्स एंड इन्वेस्टी मीट का उद्घाटन भी किया। इस बैठक में 150 से अधिक निवेशकों और निवेश की तलाश कर रहे उद्यमियों एवं प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस पहल के माध्यम से WAVEX और WAVES बाजार से जुड़े लगभग 20 प्रतिभागियों को निवेशकों के साथ जोड़ने का अवसर मिला। इसका उद्देश्य उभरते रचनात्मक व्यवसायों और संभावित निवेशकों के बीच संपर्क, संवाद और कारोबारी संबंधों को मजबूत करना था।
रचनात्मक उद्योग में नए विचारों को बड़े स्तर पर विकसित करने के लिए पूंजी, तकनीकी सहयोग और बाजार तक पहुंच महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। निवेशकों और उभरते कारोबारों के बीच इस तरह का संवाद नए उद्यमों को विस्तार देने और भारत के क्रिएटिव इकोसिस्टम को मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है।
भारतीय मीडिया उद्योग के सामने अवसर और चुनौतियां
CII बिग पिक्चर समिट 2026 में हुई चर्चा से स्पष्ट है कि भारत के मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र के भविष्य में मौलिक बौद्धिक संपदा, AI, डिजिटल प्लेटफॉर्म, क्षेत्रीय कंटेंट और वैश्विक बाजारों की अहम भूमिका होगी। भारत की सांस्कृतिक विविधता और रचनात्मक प्रतिभा उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने का अवसर देती है। लेकिन इस संभावना को वास्तविक आर्थिक उपलब्धि में बदलने के लिए टिकाऊ कारोबारी मॉडल, निवेश, बौद्धिक संपदा की सुरक्षा, बेहतर क्रियान्वयन और वैश्विक वितरण व्यवस्था पर लगातार काम करना होगा।
100 अरब डॉलर तक पहुंचने का प्रस्तावित रोडमैप उद्योग के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य प्रस्तुत करता है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार, उद्योग, निवेशक और क्रिएटर्स मिलकर इन अवसरों को कितनी प्रभावी ढंग से वास्तविक विकास में बदल पाते हैं।
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