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जैसलमेर
Great Indian Bustard: ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण में बड़ी कामयाबी, जैसलमेर में 2 नर GIB जंगल में छोड़े, गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) के संरक्षण और पुनर्वास की दिशा में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क के सैम क्षेत्र में दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को सफलतापूर्वक वन्य क्षेत्र में छोड़ा।
इस अवसर पर राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा सहित केंद्र और राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह कदम भारत के GIB संरक्षण कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार संरक्षण-प्रजनन के जरिए तैयार की गई आबादी को उसके प्राकृतिक रेगिस्तानी आवास में फिर से स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि को वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, वन अधिकारियों और ग्राउंड स्टाफ के करीब एक दशक लंबे निरंतर प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वैज्ञानिक समुदाय को GIB सहित अन्य वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण के लिए सक्षम बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। GIB राजस्थान के थार रेगिस्तान की पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण पक्षी प्रजातियों में शामिल है। इसके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक प्रजनन, आवास संरक्षण, खतरे कम करने और समुदाय की भागीदारी जैसे कई स्तरों पर काम किया जा रहा है।

संरक्षण-प्रजनन से अब जंगल में वापसी की ओर
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्य लक्ष्य एक व्यवहार्य संरक्षण-प्रजनन आबादी तैयार करना था। अब कार्यक्रम एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है—कैप्टिव ब्रीडिंग से तैयार पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़कर उन्हें फिर से वन्य आबादी का हिस्सा बनाने की दिशा में आगे बढ़ना। आज छोड़े गए दोनों नर GIB इसी रणनीति का हिस्सा हैं। इन पक्षियों की गतिविधियों और जंगल में उनके अनुकूलन से प्राप्त अनुभव का इस्तेमाल भविष्य में और पक्षियों को जंगल में छोड़ने के लिए बनाए जाने वाले प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने में किया जाएगा।
GIB संरक्षण कार्यक्रम में 97 पक्षी
सैम और रामदेवरा स्थित GIB संरक्षण-प्रजनन सुविधाओं में वर्तमान में कुल 97 पक्षी मौजूद हैं। इनमें-40 पक्षी जंगली अंडों से उत्पन्न हुए हैं, 57 पक्षियों को कैद में पाला गया है, 86 पक्षी संरक्षण-प्रजनन के लिए रखे गए हैं और 11 पक्षियों को जंगल में छोड़ने के लिए निर्धारित किया गया है इनमें से 2 नर GIB को 4 अक्टूबर 2026 को डेजर्ट नेशनल पार्क में छोड़ा गया। संरक्षण-प्रजनन कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025 में 24 और वर्ष 2026 में 29 जीवित GIB चूजे प्राप्त हुए हैं। यह प्रगति बताती है कि वैज्ञानिक प्रजनन कार्यक्रम अब एक स्थिर संरक्षण आबादी तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण चरण पार कर चुका है।

‘जंपस्टार्ट’ तकनीक से भी मिली सफलता
GIB संरक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने कई नई तकनीकों और प्रयोगों का इस्तेमाल किया है। इनमें ‘जंपस्टार्ट’ दृष्टिकोण भी शामिल है। इसके तहत कैप्टिव-लेड अंडों को जंगली GIB के घोंसलों में रखा गया। इन अंडों को जंगली मादा पक्षियों ने स्वीकार किया और इससे राजस्थान में 6 तथा गुजरात में 2 चूजों का सफल जन्म हुआ। इस तकनीक से संरक्षण-प्रजनन और प्राकृतिक आबादी के बीच एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कड़ी तैयार हुई है।
राजस्थान के रेगिस्तान में तैयार हो रहा सुरक्षित आवास
GIB को जंगल में वापस स्थापित करने के लिए केवल पक्षियों का प्रजनन पर्याप्त नहीं है। उनके लिए सुरक्षित और उपयुक्त प्राकृतिक आवास तैयार करना भी बेहद जरूरी है। इसी दिशा में राजस्थान वन विभाग द्वारा डेजर्ट नेशनल पार्क के भीतर लगभग 200 वर्ग किलोमीटर के घास के मैदानों में बाड़े विकसित किए जा रहे हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा किए गए दीर्घकालिक टेलीमेट्री अध्ययनों से इन क्षेत्रों को GIB के प्रमुख प्रजनन आवासों के रूप में चिन्हित किया गया है। इन सुरक्षित क्षेत्रों का उद्देश्य पक्षियों को बेहतर आवास उपलब्ध कराना और उनके प्रजनन तथा अस्तित्व की संभावनाओं को मजबूत करना है।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का बस्टर्ड रिकवरी प्रोग्राम कई संस्थाओं के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इसमें प्रमुख रूप से पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राजस्थान वन विभाग, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), इंटरनेशनल फंड फॉर हौबारा कंजर्वेशन और नेशनल CAMPA शामिल हैं। कार्यक्रम को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर विभिन्न संस्थाओं का सहयोग प्राप्त है। इसका फोकस केवल संरक्षण-प्रजनन तक सीमित नहीं है, बल्कि आवास प्रबंधन, खतरे में कमी, आवास बहाली और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर भी है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत संरक्षण प्रयास
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण से जुड़े प्रयासों को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर भी दिशा मिल रही है। GIB संरक्षण के लिए गठित विशेषज्ञ समिति ने प्रजाति के महत्वपूर्ण आवासों और संरक्षण उपायों को लेकर सिफारिशें दी हैं। इसके आधार पर वैज्ञानिक अध्ययन, आवास संरक्षण और खतरे कम करने के उपायों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
GIB के लिए यह कदम क्यों महत्वपूर्ण है?
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की प्राकृतिक आबादी पर कई तरह के खतरे हैं। ऐसे में केवल मौजूदा पक्षियों की सुरक्षा करना पर्याप्त नहीं है। दीर्घकालिक संरक्षण के लिए तीन चीजें महत्वपूर्ण हैं:

प्रजनन → सुरक्षित आवास → जंगल में पुनर्स्थापना
भारत का GIB कार्यक्रम अब इन तीनों चरणों को जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जैसलमेर में दो नर GIB को जंगल में छोड़ना इसी लंबी संरक्षण यात्रा का महत्वपूर्ण चरण है।
छोड़े गए दोनों पक्षियों की गतिविधियों और अनुकूलन पर वैज्ञानिक निगरानी रखी जाएगी। उनके व्यवहार, आवास उपयोग, आवाजाही और जंगल में जीवित रहने की क्षमता से जुड़ी जानकारी भविष्य के संरक्षण निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण होगी। इनसे प्राप्त अनुभव के आधार पर भविष्य में और GIB को जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जाएगा।
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