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UN New World Map: 450 साल पुराने नक्शे पर बड़ा फैसला, 164 देशों का समर्थन; अमेरिका ने किया विरोध

UN New World Map: Major decision on 450-year-old map; backed by 164 countries, opposed by the US.

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IB NEWS

नई दिल्ली
UN New World Map: 450 साल पुराने नक्शे पर बड़ा फैसला, 164 देशों का समर्थन; अमेरिका ने किया विरोध, दुनिया के नक्शे को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव को भारी बहुमत मिला है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ऐसे विश्व मानचित्रों को बढ़ावा देने के प्रस्ताव का समर्थन किया है, जो अलग-अलग देशों और महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल को अधिक सटीक रूप से प्रदर्शित करते हैं। प्रस्ताव को 164 देशों ने समर्थन दिया, जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया और छह देशों ने मतदान से दूरी बनाई।

इस पहल का केंद्र Mercator Projection की जगह अधिक क्षेत्रफल-सटीक मानचित्रों, विशेष रूप से Equal Earth Projection, को बढ़ावा देना है। हालांकि इसे समझना जरूरी है कि संयुक्त राष्ट्र ने पुराने नक्शे पर कानूनी रूप से प्रतिबंध नहीं लगाया है और न ही सभी देशों को एक ही नए नक्शे का इस्तेमाल करने के लिए बाध्य किया है। प्रस्ताव गैर-बाध्यकारी है।

क्यों चर्चा में आया 450 साल पुराना नक्शा?

दुनिया में लंबे समय से इस्तेमाल होने वाले Mercator Projection को फ्लेमिश कार्टोग्राफर Gerardus Mercator ने 1569 में विकसित किया था। इसका मूल उद्देश्य समुद्री नौवहन को आसान बनाना था। Mercator Projection में जैसे-जैसे कोई भूभाग भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की ओर जाता है, उसका आकार नक्शे पर वास्तविक क्षेत्रफल की तुलना में ज्यादा बड़ा दिखाई देता है। यही वजह है कि ग्रीनलैंड और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों को पारंपरिक नक्शे में देखने पर दोनों लगभग समान आकार के नजर आ सकते हैं, जबकि वास्तविक क्षेत्रफल में अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है।

अफ्रीका का आकार अचानक नहीं बढ़ा

सोशल मीडिया पर इसे “अफ्रीका का आकार बढ़ गया” या “दुनिया का नक्शा बदल गया” जैसे शब्दों में बताया जा रहा है। वास्तविकता इससे अलग है। अफ्रीका का वास्तविक भौगोलिक आकार बिल्कुल नहीं बदला है। बदलाव इस बात में है कि उसे सपाट कागज या डिजिटल स्क्रीन पर किस तरह प्रदर्शित किया जाता है।

पृथ्वी गोलाकार है और उसे सपाट नक्शे पर दिखाने के लिए किसी न किसी प्रकार का cartographic projection इस्तेमाल करना पड़ता है। हर projection में क्षेत्रफल, आकार, दूरी या दिशा में कुछ न कुछ विकृति आती है। Equal Earth जैसे equal-area projection का उद्देश्य महाद्वीपों के आपसी क्षेत्रफल अनुपात को ज्यादा सही तरीके से दिखाना है।

क्या है Equal Earth Projection?

Equal Earth Projection एक equal-area world map projection है, जिसे 2018 में विकसित किया गया था। इसका प्रमुख उद्देश्य दुनिया के महाद्वीपों के क्षेत्रफल को एक-दूसरे के सापेक्ष अधिक सटीक ढंग से दिखाना है। इस projection में अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और अन्य बड़े भूभाग अपने वास्तविक क्षेत्रफल के अनुपात में ज्यादा सही दिखाई देते हैं, जबकि Mercator की तुलना में ध्रुवीय क्षेत्रों का अतिरंजित आकार कम दिखाई देता है।

UN में कितने देशों ने समर्थन किया?

संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला। वोटिंग का परिणाम:

  • 164 देश – पक्ष में
  • 1 देश – विरोध में: अमेरिका
  • 6 देश – अनुपस्थित/abstain

रिपोर्टों के अनुसार भारत भी प्रस्ताव के समर्थन में मतदान करने वाले देशों में शामिल था। प्रस्ताव को टोगो ने आगे बढ़ाया और इसे अफ्रीकी संघ के सदस्य देशों तथा बहामास का समर्थन प्राप्त था।

अमेरिका ने क्यों किया विरोध?

अमेरिका इस प्रस्ताव का विरोध करने वाला एकमात्र देश रहा। अमेरिकी प्रतिनिधि ने प्रस्ताव को अनावश्यक बताया और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय शांति, समृद्धि और अच्छे संबंधों जैसी वास्तविक वैश्विक चुनौतियों से ध्यान भटकाने वाली एक “ideological agenda” को बढ़ावा देता है। इस तरह वोटिंग के बाद “UN में अमेरिका की हार” वाली सुर्खियां सामने आईं, लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह किसी बाध्यकारी कानून या संधि का मामला नहीं है।

फ्रांस और ब्रिटेन समेत कई देशों का समर्थन

प्रस्ताव को फ्रांस और ब्रिटेन सहित बड़ी संख्या में देशों का समर्थन मिला। फ्रांस ने इससे पहले भी Mercator Projection से हटकर ऐसे मानचित्रों की ओर जाने की इच्छा जताई थी, जो भूभागों के वास्तविक क्षेत्रफल को बेहतर तरीके से प्रदर्शित करते हैं।

क्या अब Google Maps और सभी नक्शे बदल जाएंगे? …. तुरंत नहीं।

यह प्रस्ताव बाध्यकारी नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि दुनिया भर के सभी स्कूल, कंपनियां, सरकारें या डिजिटल प्लेटफॉर्म अगले दिन से Mercator Map को हटाकर Equal Earth Map लगा देंगे। संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव अधिक सटीक map projections के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करता है। आगे चलकर इसका प्रभाव शिक्षा, पाठ्यपुस्तकों, मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और विभिन्न संस्थागत मानचित्रों पर पड़ सकता है।

क्या Mercator Map पूरी तरह गलत है? …..नहीं।

यह कहना सही नहीं होगा कि Mercator Map “गलत नक्शा” है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह दिशाओं और समुद्री नौवहन के लिए बेहद उपयोगी रहा है। इसी वजह से नया UN प्रस्ताव भी समुद्री और हवाई नौवहन में Mercator Projection के इस्तेमाल को चुनौती नहीं देता। समस्या तब पैदा होती है जब इसी projection को क्षेत्रफल की तुलना करने या दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के आकार को समझाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

अफ्रीका को लेकर विवाद क्यों बड़ा है?

अफ्रीकी देशों और इस अभियान से जुड़े संगठनों का तर्क है कि नक्शे पर लंबे समय से अफ्रीका का अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देना केवल तकनीकी समस्या नहीं है। उनका मानना है कि नक्शे में दिखाई देने वाली यह विकृति लोगों की भौगोलिक समझ, शिक्षा और वैश्विक धारणा को प्रभावित कर सकती है। इसी सोच के तहत टोगो और उसके समर्थक “Correct the Map” अभियान के जरिए स्कूलों, संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर ज्यादा सटीक map projections को बढ़ावा देना चाहते हैं।

450 साल में पहली बार क्या बदला? … यहां भी एक जरूरी तथ्य है।

1569 के Mercator नक्शे को 450 साल बाद दुनिया से मिटाया नहीं गया है। इसके बजाय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ऐसे मानचित्रों को बढ़ावा देने के लिए राजनीतिक समर्थन दिया है जो महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल को बेहतर ढंग से प्रदर्शित करते हैं। यानी बदलाव नक्शे पर मौजूद देशों की भौगोलिक सीमाओं में नहीं, बल्कि दुनिया को देखने और प्रदर्शित करने के तरीके में है।

दुनिया के नक्शे में अफ्रीका कैसा दिखेगा?

Equal Earth जैसे projection में अफ्रीका अपनी वास्तविक क्षेत्रफल संबंधी स्थिति के मुकाबले अधिक सही अनुपात में दिखाई देता है। इसके साथ यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे उत्तरी गोलार्ध के क्षेत्र Mercator की तुलना में अपेक्षाकृत छोटे दिखाई दे सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि इन महाद्वीपों का वास्तविक आकार कम हो गया है। केवल मानचित्र पर उनकी visual representation बदलती है।

UN का यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?

यह फैसला तकनीकी होने के साथ-साथ शिक्षा और वैश्विक प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दुनिया के नक्शे केवल भौगोलिक जानकारी देने का माध्यम नहीं हैं। स्कूलों, मीडिया, सरकारी संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों में इस्तेमाल होने वाले नक्शे लोगों की दुनिया को समझने की पहली तस्वीर बनाते हैं। इसलिए समर्थकों का मानना है कि जहां क्षेत्रफल की तुलना महत्वपूर्ण हो, वहां ऐसे projection का इस्तेमाल होना चाहिए जो भूभागों के वास्तविक आकार को अधिक सटीक रूप से प्रस्तुत करे।

आगे क्या होगा?

अब असली चुनौती इस प्रस्ताव को लागू करने की नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर अपनाने की होगी। टोगो ने संकेत दिया है कि वह अपने स्कूलों की भूगोल संबंधी सामग्री में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ेगा और अन्य देशों, संस्थानों तथा तकनीकी कंपनियों को भी इस दिशा में प्रेरित करेगा। आने वाले समय में स्कूल की किताबों, मीडिया ग्राफिक्स, डिजिटल मैपिंग और अन्य शैक्षणिक सामग्री में Equal Earth अथवा दूसरे equal-area projections का इस्तेमाल बढ़ सकता है।

UN महासभा का यह फैसला दुनिया की भौगोलिक सीमाओं को बदलने का फैसला नहीं है। अफ्रीका पहले जितना ही बड़ा है और अमेरिका, यूरोप या अन्य महाद्वीप भी अपने वास्तविक आकार में बिल्कुल नहीं बदले हैं। बदला है तो उन्हें सपाट नक्शे पर दिखाने का नजरिया।

1569 में नौवहन के लिए विकसित Mercator Projection ने सदियों तक दुनिया का एक खास दृश्य प्रस्तुत किया। अब 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ज्यादा क्षेत्रफल-सटीक मानचित्रों को बढ़ावा देने के पक्ष में भारी बहुमत से समर्थन देकर इस बहस को नई दिशा दे दी है। 164 देशों का समर्थन और अमेरिका का अकेला विरोध इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद चर्चित बना चुका है।

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Author: Ib News

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