नई दिल्ली
IIMC Convocation: AI और डीपफेक के दौर में जनसंचार की नई चुनौती, चंचल कुमार ने अधिकारियों को दिया बड़ा संदेश, भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) में भारतीय सूचना सेवा (IIS) के ग्रुप-A प्रशिक्षु अधिकारियों के पाठ्य समापन एवं दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में 2009, 2023 और 2024 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण सचिव चंचल कुमार ने जनसंचार की बदलती भूमिका, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीपफेक और गलत सूचना जैसी नई चुनौतियों पर विस्तार से बात की।
जनसंचार शासन का अभिन्न हिस्सा
समारोह को संबोधित करते हुए सूचना एवं प्रसारण सचिव चंचल कुमार ने कहा कि जनसंचार शासन का अभिन्न अंग है और बदलती तकनीकों तथा नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ इसके स्वरूप को भी लगातार विकसित होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज संचार का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर सामने आया है। वहीं, गलत सूचना, डीपफेक वीडियो, ऑडियो और तस्वीरें तथा कृत्रिम रूप से तैयार की गई सामग्री जनसंचार और सरकारी सूचना तंत्र के सामने नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं।
AI के दौर में अधिकारियों को लगातार सीखना होगा
चंचल कुमार ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि जनसंचार से जुड़े अधिकारियों को उभरती हुई तकनीकों की जानकारी रखना और लगातार अपने कौशल को अपडेट करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल केवल तेजी से सूचना पहुंचाने के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि सूचना की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि त्वरित सूचना देना महत्वपूर्ण है, लेकिन सटीकता और विश्वसनीयता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, प्रत्येक सूचना किसी संस्था की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता को दर्शाती है।
जनसंचार एकतरफा नहीं, दोतरफा प्रक्रिया होनी चाहिए
सूचना एवं प्रसारण सचिव ने कहा कि जनसंचार को केवल सरकार या संस्थाओं की ओर से जनता तक सूचना पहुंचाने तक सीमित नहीं रखा जा सकता। यह दोतरफा प्रक्रिया होनी चाहिए, जिसमें जनता की प्रतिक्रिया को भी महत्व दिया जाए। उन्होंने कहा कि लोगों से मिलने वाली प्रतिक्रिया नीतियों को बेहतर बनाने और उनके प्रभावी कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़े रहने की सलाह दी और कहा कि संचार से जुड़े अधिकारियों को शासन के अन्य पहलुओं को भी समझने के लिए तैयार रहना चाहिए। चंचल कुमार ने अधिकारियों को अपने दायित्वों का निर्वहन करते समय लोगों के हित को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को हमेशा खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या उनके काम से लोगों, खासकर समाज के सबसे गरीब और जरूरतमंद वर्गों को मदद मिल रही है?

यदि इसका जवाब सकारात्मक नहीं है तो काम करने के तरीके पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए और लोगों की वास्तविक चिंताओं को समझते हुए नई रणनीति तैयार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी संचार में सहानुभूति, संवेदनशीलता और जनता की जरूरतों की समझ बेहद महत्वपूर्ण है।
IIMC की कुलपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों को दी शुभकामनाएं
समारोह में भारतीय जनसंचार संस्थान की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौर ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारी ऐसे पहले बैच के अधिकारी हैं, जिन्होंने जनसंचार के क्षेत्र में IIMC से स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने इसे संस्थान की अकादमिक भूमिका और व्यावसायिक प्रशिक्षण के बीच मजबूत संबंध का उदाहरण बताया। डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौर ने कहा कि जनसंचार का अर्थ केवल सूचना देना नहीं है, बल्कि लोगों में समझ विकसित करना भी है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से अपने दायित्वों का निर्वहन स्पष्टता, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ करने का आह्वान किया।
बदलते मीडिया परिदृश्य में निरंतर सीखना जरूरी
IIMC की कुलपति ने कहा कि जनसंचार का क्षेत्र लगातार विकसित हो रहा है। ऐसे में पेशेवरों के लिए सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एमए डिग्री प्रशिक्षु अधिकारियों को निरंतर सीखते रहने और बदलती तकनीकों तथा संचार माध्यमों के अनुरूप खुद को विकसित करने की प्रेरणा देती है।
समारोह में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अपर सचिव प्रभात, संयुक्त सचिव के.के. निराला, प्रशिक्षण महानिदेशक एल. मधु नाग, वरिष्ठ अधिकारी, IIMC के संकाय सदस्य और IIS के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित रहे।

डिजिटल युग में सरकारी संचार की नई चुनौती
IIMC में आयोजित यह समारोह ऐसे समय में हुआ है जब सरकारी संचार का दायरा पारंपरिक मीडिया से आगे बढ़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य नए माध्यमों तक पहुंच चुका है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ जहां सूचना को तेजी से तैयार और प्रसारित करने की क्षमता बढ़ी है, वहीं फेक न्यूज, डीपफेक और कृत्रिम रूप से तैयार सामग्री की पहचान भी एक बड़ी चुनौती बन गई है।
ऐसे दौर में सूचना अधिकारियों की भूमिका केवल सूचना प्रसारित करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें तथ्य-जांच, विश्वसनीयता, डिजिटल संचार, तकनीकी समझ और जनता के साथ प्रभावी संवाद पर भी लगातार काम करना होगा।
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