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CBN-Pharmexcil MoU: फार्मा निर्यात को मिलेगा बढ़ावा, अवैध दुरुपयोग पर भी कसेगा शिकंजा

CBN-Pharmexcil MoU: Pharma exports to get a boost; crackdown on illicit misuse to intensify.

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केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो और Pharmexcil के बीच समझौता; स्वैच्छिक आचार संहिता, सूचना साझा करने और निर्यातकों के लिए आसान अनुपालन पर जोर

IB NEWS

नई दिल्ली/ग्वालियर:CBN-Pharmexcil MoU: फार्मा निर्यात को मिलेगा बढ़ावा, अवैध दुरुपयोग पर भी कसेगा शिकंजा, भारत के फार्मास्यूटिकल निर्यात को बढ़ावा देने और फार्मा उत्पादों के अवैध दुरुपयोग को रोकने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा स्थापित फार्मास्यूटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (Pharmexcil) के बीच 25 अगस्त 2026 को ग्वालियर स्थित CBN मुख्यालय में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस समझौते का उद्देश्य भारत के तेजी से बढ़ते फार्मास्यूटिकल निर्यात को आसान बनाना, वैध अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना और साथ ही दवाओं, नियंत्रित पदार्थों तथा आवश्यक रसायनों की अवैध चोरी, तस्करी या दुरुपयोग को रोकने के लिए नियामक निगरानी को मजबूत करना है। भारत को Active Pharmaceutical Ingredients (API), Bulk Drugs, Formulations, Biologics और Medical Devices के प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं में गिना जाता है।

ऐसे में फार्मा निर्यात के विस्तार के साथ यह भी जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में शामिल उत्पादों और नियंत्रित पदार्थों की निगरानी प्रभावी बनी रहे। CBN और Pharmexcil के बीच हुआ यह MoU इसी संतुलन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन काम करने वाला केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS Act) के तहत सरलीकरण, नियमन और प्रवर्तन से संबंधित महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाता है। जैसेकि-अफीम पोस्त की वैध खेती की निगरानी, स्वापक औषधियों और मन:प्रभा तथा NDPS कानून के प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन शामिल हैं।
नया समझौता सरकार के Ease of Doing Business के व्यापक रोडमैप को फार्मास्यूटिकल निर्यात क्षेत्र से जोड़ता है। इसके तहत उद्योग के साथ सहयोग करके ऐसी प्रक्रियाओं की पहचान की जाएगी, जिनसे वैध और अनुपालन करने वाले निर्यातकों के लिए व्यापार प्रक्रिया को अधिक सरल और प्रभावी बनाया जा सके। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित रखने के लिए स्वैच्छिक अनुपालन व्यवस्था को फार्मा निर्यात इकोसिस्टम में शामिल किया जाएगा।
MoU के तहत सरकार, Pharmexcil के साथ परामर्श करके Voluntary Code of Conduct (VCC) तैयार करेगी। इसका उद्देश्य फार्मा उद्योग के लिए बेहतर और जिम्मेदार कारोबारी प्रक्रियाओं की सिफारिश करना होगा। खास बात यह है कि यह आचार संहिता:-स्वैच्छिक होगी, गैर-बाध्यकारी होगी, सामान्य कारोबारी गतिविधियों में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करेगी और मौजूदा कानूनों के अतिरिक्त कोई नया वैधानिक बोझ नहीं डालेगी व निर्यातकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डालेगी। इससे उद्योग को अनुपालन के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश मिल सकेंगे।
MoU का एक प्रमुख उद्देश्य अनुपालन करने वाले फार्मास्यूटिकल निर्यातकों के लिए वैध निर्यात प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना है। दोनों पक्ष मिलकर परिचालन से जुड़ी बाधाओं की पहचान करेंगे और ऐसी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम करेंगे जिससे निर्यातकों को अनावश्यक देरी और प्रक्रियागत कठिनाइयों से राहत मिल सके। इसका सीधा असर भारत के फार्मा निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ सकता है।
CBN और Pharmexcil निर्यातकों के लिए संयुक्त रूप से- कार्यशालाएं, सेमिनार, प्रशिक्षण कार्यक्रम और जागरूकता अभियान आयोजित करेंगे। जरूरत पड़ने पर इन कार्यक्रमों में CDSCO और सीमा शुल्क विभाग जैसे संबंधित सरकारी संस्थानों को भी शामिल किया जाएगा। इससे फार्मा कंपनियों को नियंत्रित दवाओं, पदार्थों और रसायनों से संबंधित नियमों तथा अनुपालन आवश्यकताओं की बेहतर जानकारी मिल सकेगी।
समझौते के तहत दोनों पक्ष नियामक उद्देश्यों के लिए आवश्यक सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था भी विकसित करेंगे।हालांकि सूचना साझा करने की प्रक्रिया लागू कानूनों और गोपनीयता संबंधी दायित्वों के अधीन होगी। फार्मा उद्योग भी Voluntary Code of Conduct से जुड़े मामलों के समन्वय के लिए सदस्य कंपनियों में से ‘जानकारी रखने वाले व्यक्तियों’ को नामित करने की दिशा में प्रयास करेगा।
औपचारिक हस्ताक्षर समारोह में CBN की ओर से नारकोटिक्स कमिश्नर डॉ. दिनेश बिसेन और Pharmexcil के महानिदेशक राजा भानु ने MoU के दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया। हस्ताक्षर के बाद दोनों पक्षों ने आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की। समझौते के बाद तैयार की जाने वाली छह महीने की कार्ययोजना में पूरे देश में पहुंच बढ़ाने और फार्मा क्षेत्र के हितधारकों को जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा संस्थागत और नियामक सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों को चिन्हित करके उनके क्रियान्वयन की दिशा में काम किया जाएगा।
भारत के लिए फार्मास्यूटिकल निर्यात आर्थिक विकास और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर, कुछ दवाएं, मन:प्रभावी पदार्थ और नियंत्रित प्रीकर्सर गलत हाथों में पहुंचने पर गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। ऐसे में CBN और Pharmexcil का यह सहयोग ‘व्यापार सुगमता’ और ‘नियामक सुरक्षा’ के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है।

सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें वैध फार्मा कारोबार तेजी से आगे बढ़े, जबकि नियंत्रित पदार्थों की चोरी, तस्करी और दुरुपयोग की संभावनाओं को प्रभावी तरीके से रोका जा सके। यह समझौता भारत के फार्मास्यूटिकल क्षेत्र के लिए कई स्तरों पर महत्वपूर्ण हो सकता है। पहला, इससे वैध फार्मा निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाने में मदद मिलेगी। दूसरा, निर्यातकों के लिए अनुपालन संबंधी जागरूकता बढ़ेगी। तीसरा, सरकारी एजेंसियों और उद्योग के बीच सूचना एवं समन्वय बेहतर हो सकता है। चौथा, नियंत्रित दवाओं और प्रीकर्सर्स के अवैध दुरुपयोग के खिलाफ निगरानी मजबूत होगी। पांचवां, भारत के वैश्विक फार्मा सप्लाई चेन में भरोसेमंद और जिम्मेदार आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थिति को और मजबूत करने में मदद मिल सकती है। सरकार ने इस समझौते के जरिए फार्मास्यूटिकल क्षेत्र के अनुपालनपूर्ण, सुरक्षित और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

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