चीनी महंगी हुई तो केजरीवाल ने उठाया E20 का मुद्दा!
केजरीवाल ने पूछा-“विदेशी मुद्रा बचाने चले थे, अब चीनी आयात क्यों?”
अरुण कुमार
नई दिल्ली: चीनी की बढ़ती कीमतों पर केजरीवाल का मोदी सरकार पर हमला, बोले- ‘ये सरकार है या मजाक?’ देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने चीनी के दामों में उछाल को केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति से जोड़ते हुए मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने के लिए गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन में किया गया, जिसके कारण घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई और अब कीमतें बढ़ रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस नीति का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बचाना था, उसी के चलते अब चीनी आयात करने की स्थिति क्यों बन रही है।

‘विदेशी मुद्रा बचाने के लिए इथेनॉल बनाया, अब चीनी आयात करनी पड़ रही’
केजरीवाल का कहना है कि सरकार ने पेट्रोलियम आयात पर होने वाले विदेशी मुद्रा खर्च को कम करने के लिए गन्ने से इथेनॉल बनाने को बढ़ावा दिया। उनके मुताबिक, इससे चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा प्रभावित हुई और अब घरेलू बाजार में आपूर्ति का दबाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसी आधार पर केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए इसे आर्थिक फैसलों की विडंबना बताया।
हालांकि, चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी को केवल इथेनॉल नीति का नतीजा बताना अभी पूरी तरह स्थापित तथ्य नहीं है। बाजार रिपोर्टों में कम आपूर्ति, कमजोर बारिश से गन्ने की फसल पर असर और त्योहारों से पहले बढ़ती मांग जैसे कई कारण भी बताए जा रहे हैं।
चीनी के दाम रिकॉर्ड स्तर पर
अगस्त 2026 में भारत में चीनी की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक घरेलू चीनी कीमतें अगस्त में करीब 20% तक बढ़ी हैं, जबकि कुछ प्रमुख थोक बाजारों में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची हैं। मुंबई में खुदरा चीनी की कीमत हाल में करीब ₹58 प्रति किलो तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है, जबकि कुछ बाजारों में यह ₹60 के आसपास पहुंचने की स्थिति में है।
सरकार ने भी उठाए कदम
बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने चीनी के बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा सख्त कर दी है। 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 के बीच 10 मीट्रिक टन से ज्यादा मासिक खपत वाले थोक उपभोक्ताओं को अधिकतम 15 दिनों की जरूरत के बराबर स्टॉक रखने की सीमा लागू होगी। इसका उद्देश्य जमाखोरी रोकना और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
इसके अलावा सरकार घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए सीमित ड्यूटी-फ्री चीनी आयात सहित कई विकल्पों पर विचार कर रही है। रिपोर्टों में चीनी मिलों को अक्टूबर तक करीब 10 लाख मीट्रिक टन तक ड्यूटी-फ्री चीनी आयात की अनुमति देने जैसे विकल्पों पर चर्चा का उल्लेख है।
इथेनॉल बनाम चीनी: क्या है पूरा विवाद?
भारत ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति को ऊर्जा सुरक्षा, पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाने और विदेशी मुद्रा बचाने के उद्देश्य से आगे बढ़ाया है। लेकिन मौजूदा चीनी संकट ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—क्या गन्ने को चीनी उत्पादन के बजाय इथेनॉल के लिए ज्यादा इस्तेमाल करने से घरेलू चीनी आपूर्ति पर दबाव पड़ा है?
बाजार विश्लेषण के मुताबिक 2025-26 चीनी वर्ष में करीब 30 लाख टन गन्ने के बराबर उत्पादन इथेनॉल की ओर डायवर्ट होने का अनुमान है। इसमें लगभग 9 लाख टन सीधे E20 ब्लेंडिंग कार्यक्रम से जुड़ा बताया गया है। हालांकि, चीनी बाजार की मौजूदा स्थिति में मौसम, उत्पादन, घरेलू मांग और आगामी त्योहारी सीजन जैसे अन्य कारक भी महत्वपूर्ण हैं।
केजरीवाल ने साधा सीधा राजनीतिक निशाना
केजरीवाल ने अपने बयान में केंद्र सरकार की आर्थिक नीति पर सवाल उठाते हुए इसे ‘अनपढ़ सरकार’ तक कह दिया। उनका तर्क है कि अगर इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने का इस्तेमाल करने से चीनी की कमी पैदा हुई और अब विदेश से चीनी मंगाने की जरूरत पड़ रही है, तो विदेशी मुद्रा बचाने वाली नीति का उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ जाता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब हैं और सरकार बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है।
चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार के सामने कई विकल्प हैं—स्टॉक लिमिट, मिलों की बिक्री व्यवस्था में बदलाव, आयात शुल्क में कटौती और जरूरत पड़ने पर सीमित आयात। साथ ही यह बहस भी तेज हो गई है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और E20 नीति के साथ खाद्य सुरक्षा तथा घरेलू चीनी आपूर्ति के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आने वाले महीनों में त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरकार और बाजार दोनों की निगाहें कीमतों तथा घरेलू उपलब्धता पर रहेंगी
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1 thought on “चीनी की बढ़ती कीमतों पर केजरीवाल का मोदी सरकार पर हमला, बोले- ‘ये सरकार है या मजाक?’”
Ye typical politicies ke naam par politics jo chalta aa raha hai usse upar soz aur samaj ke developmental issues ko importance dena chahiye sabko