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BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में भारत का बड़ा संदेश: विकास और पर्यावरण साथ-साथ

India sends a strong message at the BRICS Environment Ministers' meeting; Bhupender Yadav says development and environment go hand in hand.

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अरुण कुमार

नई दिल्ली: BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में भारत का बड़ा संदेश: विकास और पर्यावरण साथ-साथ, भारत की अध्यक्षता में मंगलवार को नई दिल्ली में 12वीं BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने BRICS सदस्य देशों के पर्यावरण मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों का स्वागत किया। बैठक में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, प्रदूषण, वन अग्नि प्रबंधन, जलवायु अनुकूलन, चक्रीय अर्थव्यवस्था और सतत जीवनशैली जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।

बैठक को संबोधित करते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत की BRICS अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस दृष्टि से निर्देशित है, जिसमें विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की चिंताओं को वैश्विक एजेंडे में प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि भारत BRICS को सहयोग, नवाचार और सतत विकास के लिए एक प्रभावी मंच के रूप में आगे बढ़ाना चाहता है, जिसमें जन-केंद्रित दृष्टिकोण और मानवता की भावना सर्वोपरि हो।

विकासशील देशों के सामने बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियां

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकासशील देशों, विशेषकर ग्लोबल साउथ, को जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में कमी, प्रदूषण और आपदा जोखिम जैसी कई गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय असुरक्षा अक्सर व्यापक विकास संबंधी प्राथमिकताओं से सीधे जुड़ी होती है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण की नीतियों को केवल संरक्षण तक सीमित न रखते हुए उन्हें विकास और स्थानीय समुदायों की जरूरतों से जोड़ना जरूरी है।

वन अग्नि से निपटने के लिए BRICS सहयोग मजबूत करने पर जोर

भूपेंद्र यादव ने BRICS देशों के बीच वन अग्नि प्रबंधन को लेकर सहयोग मजबूत करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने जंगलों में आग की रोकथाम, बेहतर तैयारी, शुरुआती चेतावनी प्रणाली, त्वरित प्रतिक्रिया और आग लगने के बाद पुनर्स्थापन जैसे क्षेत्रों में BRICS देशों के बीच ज्ञान और तकनीक साझा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कई क्षेत्रों में वन अग्नि का खतरा बढ़ रहा है और इससे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

जलवायु वित्त और स्थानीय समुदायों की भूमिका अहम

केंद्रीय मंत्री ने विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त, जलवायु अनुकूलन और स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीति तभी प्रभावी होगी, जब उसमें स्थानीय समुदायों को सक्रिय भागीदार बनाया जाए। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को जोड़कर अधिक प्रभावी और टिकाऊ समाधान विकसित किए जा सकते हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र और मानव विकास साथ-साथ

भूपेंद्र यादव ने भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्स्थापन और मानव विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने भारत की मिशन LiFE और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहलों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन अभियानों में पर्यावरण संरक्षण के साथ जनभागीदारी और सामुदायिक स्वामित्व को भी जोड़ा गया है।

उन्होंने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि पर्यावरणीय समाधान वैज्ञानिक रूप से मजबूत, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप और सामाजिक रूप से समावेशी होने चाहिए।

भारत की BRICS अध्यक्षता की चार प्रमुख प्राथमिकताएं

भूपेंद्र यादव ने भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत पर्यावरण क्षेत्र की चार प्रमुख प्राथमिकताएं भी रेखांकित कीं—

  1. सतत जीवनशैली को बढ़ावा देना
  2. वनरोपण, वन अग्नि प्रबंधन और आपदा से निपटने की क्षमता बढ़ाना
  3. चक्रीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करना
  4. जलवायु परिवर्तन के अनुरूप अनुकूलन क्षमता को मजबूत करना

उन्होंने कहा कि इन प्राथमिकताओं के पीछे भारत का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि पर्यावरणीय कार्रवाई जन-केंद्रित, सतत और क्रियान्वयन आधारित होनी चाहिए तथा विकासशील देशों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए।

2031-2035 के लिए भारत की जलवायु प्रतिबद्धता

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2031-2035 के लिए भारत का नया राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) समावेशी विकास और ऊर्जा सुरक्षा के साथ जलवायु परिवर्तन से निपटने की भारत की महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जलवायु कार्रवाई को विकास की आवश्यकताओं और ऊर्जा सुरक्षा के साथ संतुलित करते हुए आगे बढ़ाना भारत की प्राथमिकता है।

BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में चार महत्वपूर्ण परिणाम

12वीं BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक का समापन संयुक्त मंत्रिस्तरीय वक्तव्य को सर्वसम्मति से अपनाने के साथ हुआ। इसके साथ चार ज्ञान संकलन भी प्रस्तुत किए गए। बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों पर परिणाम सामने आए—

1. सतत जीवनशैली के लिए BRICS संस्थानों का नेटवर्क

सतत जीवनशैली में ज्ञान साझाकरण, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए BRICS संस्थानों का नेटवर्क स्थापित करने के प्रस्ताव पर विचार किया गया।

2. एकीकृत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन

मरुस्थलीकरण से निपटने, सतत भूमि प्रबंधन और पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन के लिए एकीकृत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन हेतु BRICS सिद्धांत पर जोर दिया गया।

3. वन अग्नि प्रबंधन पर आम सहमति

BRICS देशों में वन अग्नि की घटनाओं से निपटने के लिए तैयारी और प्रभावी प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए साझा सहमति विकसित की गई।

4. समुदाय आधारित जलवायु अनुकूलन

पारंपरिक ज्ञान पर आधारित जन-केंद्रित और समुदाय-आधारित जलवायु अनुकूलन के लिए BRICS सिद्धांत को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

जलवायु परिवर्तन पर BRICS उच्च स्तरीय संवाद

बैठक के दौरान ‘जलवायु परिवर्तन पर BRICS उच्च स्तरीय संवाद – जन-केंद्रित, समुदाय-आधारित अनुकूलन’ भी आयोजित किया गया। इसमें आधुनिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के साथ पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय प्रथाओं को जोड़कर जलवायु अनुकूलन को मजबूत करने पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य ऐसी जलवायु रणनीतियां विकसित करना है, जो स्थानीय जरूरतों के अनुरूप हों और जिनमें समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो।

एकीकृत भूदृश्य-आधारित हरियाली पर चर्चा

एक अन्य महत्वपूर्ण चर्चा ‘एकीकृत भूदृश्य-आधारित हरियाली पर केंद्रित रही। इस दौरान BRICS सदस्य देशों ने प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन और सतत विकास से जुड़ी सफल पहलों और अनुभवों को साझा किया। इससे सदस्य देशों के बीच पर्यावरणीय ज्ञान, तकनीक और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

मिशन LiFE पवेलियन बना आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक डिजिटल और इंटरैक्टिव मिशन LiFE पवेलियन स्थापित किया। पवेलियन में इमर्सिव गेमिंग और इंटरैक्टिव तकनीकों के माध्यम से भारत की प्रमुख पर्यावरणीय पहलों को प्रदर्शित किया गया। इसका उद्देश्य प्रतिनिधियों को भारत के सतत जीवनशैली संबंधी प्रयासों का आधुनिक और आकर्षक अनुभव प्रदान करना था।

भारतीय संस्कृति की भी दिखी झलक

दो दिवसीय BRICS पर्यावरण बैठक के दौरान सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के लिए भारतीय कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविधता की जीवंत झलक देखने को मिली।

BRICS में पर्यावरण सहयोग को नई दिशा

12वीं BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक ने यह संकेत दिया कि पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए केवल राष्ट्रीय स्तर के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, वन अग्नि और प्रदूषण जैसी चुनौतियों के लिए देशों के बीच तकनीकी सहयोग, ज्ञान साझाकरण और सामूहिक कार्रवाई जरूरी है।

भारत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जन-केंद्रित और विकासोन्मुख पर्यावरणीय दृष्टिकोण पर विशेष जोर दिया गया। भारत ने BRICS देशों के बीच तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण, ज्ञान साझाकरण और संस्थागत साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

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Author: Ib News

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