IB NEWS
नई दिल्ली: ‘दिमागी नक्सल’ PM मोदी के एक शब्द से बनी ‘पार्टी’, 48 घंटे में 1.8 लाख फॉलोअर्स, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त 2026 को लाल किले से दिए गए स्वतंत्रता दिवस संबोधन में इस्तेमाल किया गया ‘दिमागी नक्सल’ शब्द अब सोशल मीडिया पर एक नए डिजिटल ट्रेंड का रूप ले चुका है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बाद इंटरनेट की दुनिया में ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ (Dimagi Naxal Party) नाम से एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म सामने आया है, जिसने बेहद कम समय में बड़ी संख्या में सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान आकर्षित किया है।
इंस्टाग्राम पर @dimaginaxalparty नाम से बनाए गए हैंडल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री के भाषण के बाद शुरू हुए इस डिजिटल प्रयोग से महज 24 घंटे में करीब 1 लाख लोग जुड़े और दो दिनों के भीतर फॉलोअर्स की संख्या 1.8 लाख से अधिक पहुंच गई।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ भारत निर्वाचन आयोग से मान्यता प्राप्त कोई राजनीतिक दल नहीं है। यह सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर राजनीतिक व्यंग्य और डिजिटल प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया प्लेटफॉर्म है।

PM मोदी के भाषण के बाद सामने आया नया डिजिटल प्लेटफॉर्म
15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस शब्द को लेकर बहस शुरू हो गई। जहां एक तरफ इसे नक्सलवाद के वैचारिक प्रभाव के खिलाफ चेतावनी के रूप में देखा गया, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक आलोचकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे अलग-अलग राजनीतिक संदर्भों में समझना शुरू किया।
इसी बहस के बीच इंस्टाग्राम पर ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम का अकाउंट सामने आया।
24 घंटे में 1 लाख, दो दिन में 1.8 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की सबसे ज्यादा चर्चा इसकी तेजी से बढ़ती सोशल मीडिया पहुंच को लेकर हुई। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, इंस्टाग्राम हैंडल ने पहले 24 घंटे में करीब 1 लाख फॉलोअर्स हासिल किए। इसके बाद दो दिनों में यह संख्या 1.8 लाख से ज्यादा हो गई।

सोशल मीडिया के दौर में किसी नए राजनीतिक व्यंग्यात्मक अकाउंट के लिए इतनी तेजी से फॉलोअर्स जुटना अपने आप में डिजिटल राजनीति और ऑनलाइन जनमत के बदलते स्वरूप को दिखाता है।
हालांकि सोशल मीडिया फॉलोअर्स की संख्या लगातार बदलती रहती है और ऐसे आंकड़ों को संबंधित प्लेटफॉर्म पर वास्तविक समय में सत्यापित करना जरूरी होता है।
X पर भी बनाया गया अकाउंट
इंस्टाग्राम के अलावा X पर भी @DNJP_India नाम से अकाउंट सामने आया। बताए गए आंकड़ों के अनुसार इस अकाउंट से भी 7 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स जुड़ चुके हैं। इससे साफ है कि ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ का डिजिटल प्रयोग केवल इंस्टाग्राम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि X पर भी राजनीतिक व्यंग्य और बहस का हिस्सा बन गया।
क्या है ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ का स्लोगन?
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म ने अपना स्लोगन रखा है—
“सोचो, रिसर्च करो, विरोध करो।”
यह स्लोगन सीधे तौर पर सोचने, जानकारी जुटाने और असहमति व्यक्त करने की अवधारणा पर केंद्रित दिखाई देता है।
इसके सोशल मीडिया बायो में पार्टी के फाउंडर के तौर पर “एक दिमागी भारतीय” और को-फाउंडर के तौर पर “56 इंच वाले” व्यक्ति का उल्लेख किया गया है। यह भाषा राजनीतिक व्यंग्य और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक छवि से जुड़े लोकप्रिय संदर्भ की ओर इशारा करती है।
कौन है इसका फाउंडर?
‘दिमागी नक्सल पार्टी’ के नाम से सोशल मीडिया अकाउंट तो तेजी से लोकप्रिय हुए हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसके पीछे मौजूद व्यक्ति या व्यक्तियों की विश्वसनीय और आधिकारिक पहचान सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
सोशल मीडिया बायो में ‘एक दिमागी भारतीय’ को फाउंडर बताया गया है। इसे फिलहाल अकाउंट की अपनी प्रस्तुति के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। इसलिए किसी व्यक्ति को इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का वास्तविक संस्थापक बताना तब तक उचित नहीं होगा, जब तक स्वयं संचालकों की ओर से विश्वसनीय पहचान या आधिकारिक जानकारी सामने न आए।

क्या यह असली राजनीतिक पार्टी है?
नहीं। ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ कोई पंजीकृत या निर्वाचन आयोग से मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल नहीं है। यह मुख्य रूप से सोशल मीडिया आधारित डिजिटल व्यंग्य/राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है। भारत में किसी वास्तविक राजनीतिक दल की आधिकारिक राजनीतिक पहचान के लिए कानूनी एवं निर्वाचन संबंधी प्रक्रियाएं होती हैं। केवल सोशल मीडिया अकाउंट बना लेने से कोई संगठन राजनीतिक दल नहीं बन जाता।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बाद नया डिजिटल प्रयोग
सोशल मीडिया पर राजनीतिक व्यंग्य के लिए काल्पनिक या मजाकिया पार्टी नामों का इस्तेमाल कोई नया प्रयोग नहीं है।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ जैसे डिजिटल ट्रेंड के बाद ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ का सामने आना दिखाता है कि सोशल मीडिया पर राजनीतिक बयानों को यूजर्स किस तरह नए मीम, स्लोगन और डिजिटल पहचान में बदल देते हैं।
आज राजनीतिक संवाद केवल राजनीतिक दलों के आधिकारिक मंचों तक सीमित नहीं है। आम सोशल मीडिया यूजर्स भी किसी बयान को लेकर अपना अलग डिजिटल नैरेटिव तैयार कर सकते हैं।

‘दिमागी नक्सल’ से ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ तक कैसे पहुंची बहस?
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण से हुई।
प्रधानमंत्री द्वारा ‘दिमागी नक्सल’ शब्द इस्तेमाल किए जाने के बाद इसके अर्थ को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं सामने आईं।
एक पक्ष इसे नक्सलवाद की वैचारिक जड़ों और उसके समर्थन तंत्र से जोड़कर देख रहा है। तो दूसरा पक्ष इसे राजनीतिक विरोध और असहमति को एक विशेष लेबल देने की कोशिश के रूप में देख रहा है।
इसी विवाद के बीच सोशल मीडिया ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को पलटकर एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक ब्रांड—‘दिमागी नक्सल पार्टी’—में बदल दिया।
‘सोचो, रिसर्च करो, विरोध करो’ क्यों महत्वपूर्ण है?
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का स्लोगन—“सोचो, रिसर्च करो, विरोध करो”—दरअसल राजनीतिक असहमति की सोशल मीडिया भाषा को सामने लाता है।
यह संदेश संकेत देता है कि प्लेटफॉर्म अपने आपको किसी पारंपरिक राजनीतिक पार्टी के बजाय विचार, आलोचना और विरोध के डिजिटल मंच के रूप में पेश करना चाहता है।
हालांकि इसके वास्तविक राजनीतिक उद्देश्य और भविष्य की गतिविधियों के बारे में अभी निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

क्या यह नया राजनीतिक नैरेटिव बन सकता है?
यह सवाल अभी खुला है।
अगर ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ केवल सोशल मीडिया ट्रेंड और राजनीतिक व्यंग्य तक सीमित रहती है तो इसे इंटरनेट संस्कृति का एक और उदाहरण माना जाएगा।
लेकिन अगर इसके पीछे कोई संगठित डिजिटल अभियान विकसित होता है, नियमित राजनीतिक कंटेंट सामने आता है और बड़ी संख्या में लोग इससे सक्रिय रूप से जुड़ते हैं, तो यह सोशल मीडिया आधारित राजनीतिक संवाद का नया उदाहरण बन सकता है।
असली कहानी सिर्फ फॉलोअर्स की नहीं
‘दिमागी नक्सल पार्टी’ की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता को केवल फॉलोअर्स की संख्या के आधार पर देखना पर्याप्त नहीं होगा।
इस घटनाक्रम का बड़ा संकेत यह है कि राजनीतिक शब्द अब सोशल मीडिया पर अपने मूल संदर्भ से निकलकर नए अर्थ और नए नैरेटिव हासिल कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने जिस शब्द का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा और नक्सलवाद के संदर्भ में किया, सोशल मीडिया के एक हिस्से ने उसी शब्द को राजनीतिक व्यंग्य और डिजिटल पहचान में बदल दिया।
यही सोशल मीडिया राजनीति की ताकत भी है और उसकी जटिलता भी।
‘दिमागी नक्सल पार्टी’ फिलहाल कोई असली राजनीतिक दल नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर उभरा एक डिजिटल और व्यंग्यात्मक प्लेटफॉर्म है।
लेकिन इसकी तेजी से बढ़ती पहुंच ने एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़ा किया है—क्या आने वाले समय में राजनीतिक बयान सिर्फ राजनीतिक बहस तक सीमित रहेंगे या सोशल मीडिया यूजर्स उन्हें अपने हिसाब से नए डिजिटल नैरेटिव में बदलते रहेंगे?
प्रधानमंत्री मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ शब्द से शुरू हुई बहस अब ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ तक पहुंच गई है। आगे यह सिर्फ सोशल मीडिया का ट्रेंड बनकर रह जाता है या कोई बड़ा डिजिटल राजनीतिक अभियान बनता है, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।
- दिमागी नक्सल पार्टी क्या है
- Dimagi Naxal Party
- Dimagi Naxal Party Instagram
- दिमागी नक्सल पार्टी फाउंडर
- PM Modi दिमागी नक्सल
- नरेंद्र मोदी दिमागी नक्सल
- दिमागी नक्सल सोशल मीडिया
- Urban Naxal vs Dimagi Naxal
- दिमागी नक्सल विवाद
- 15 अगस्त 2026 मोदी भाषण










1 thought on “‘दिमागी नक्सल’ PM मोदी के एक शब्द से बनी ‘पार्टी’, 48 घंटे में 1.8 लाख फॉलोअर्स”
Ye ek trend banta dekhai de raha hai. Iske pichhe sabhi ka chita dhara aur niyat kya hai ye zaroori hai.