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‘प्रहार’! भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति के 7 स्तंभ और पूरी रणनीति,

New Delhi: What is "Prahaar"? The seven pillars and overall strategy of India's first national counter-terrorism policy.

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अरुण कुमार

नई दिल्ली: ‘प्रहार’! भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति के 7 स्तंभ और पूरी रणनीति, भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ देश की रणनीति को और मजबूत करने के लिए 23 फरवरी 2026 को देश की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति एवं रणनीति ‘प्रहार’ शुरू की। यह नीति आतंकवादी गतिविधियों की रोकथाम, त्वरित प्रतिक्रिया, खुफिया जानकारी के प्रभावी इस्तेमाल और आतंकवाद के वित्तीय नेटवर्क को खत्म करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचा प्रदान करती है।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में ‘प्रहार’ नीति और इसके कार्यान्वयन से जुड़ी जानकारी साझा की।

सरकार के अनुसार, यह रणनीति केवल सुरक्षा एजेंसियों तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ के समन्वित दृष्टिकोण पर आधारित है। इसका उद्देश्य भारत को केवल आतंकवादी हमलों के बाद प्रतिक्रिया देने वाली व्यवस्था से आगे बढ़ाकर खुफिया जानकारी आधारित सक्रिय आतंकवाद-रोधी नीति की दिशा में ले जाना है।

‘प्रहार’ भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति एवं रणनीति है। इसके माध्यम से आतंकवाद के बदलते स्वरूप से निपटने के लिए विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य एजेंसियों, सुरक्षा बलों, खुफिया संगठनों और अन्य संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया गया है।

रणनीति का मुख्य उद्देश्य आतंकवादी हमलों को रोकना, खतरे के अनुरूप तेजी से प्रतिक्रिया देना, आतंकवादी नेटवर्क को खत्म करना और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियों को कम करना है। इसके साथ ही नीति में कानून के शासन और मानवाधिकारों के सिद्धांतों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

सरकार द्वारा शुरू की गई यह राष्ट्रीय रणनीति सात प्रमुख स्तंभों पर आधारित है।
1. आतंकी हमलों की रोकथाम- पहला और सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए आतंकवादी हमलों को होने से पहले रोकना है। इसके लिए खुफिया जानकारी, निगरानी और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया है।
2. खतरे के अनुरूप त्वरित प्रतिक्रिया- किसी भी आतंकवादी खतरे या हमले की स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तेजी से और खतरे की प्रकृति के अनुरूप प्रतिक्रिया देने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
3. सरकारी क्षमताओं का एकीकरण- ‘प्रहार’ के तहत विभिन्न सरकारी एजेंसियों की क्षमताओं और संसाधनों को एक व्यापक ढांचे में जोड़ने पर जोर है, ताकि आतंकवाद से निपटने में अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल कायम हो।
4. मानवाधिकार और कानून का शासन- आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के दौरान मानवाधिकारों और कानून के शासन को महत्व दिया गया है। रणनीति का उद्देश्य प्रभावी सुरक्षा कार्रवाई के साथ कानूनी प्रक्रियाओं और संवैधानिक मूल्यों का पालन सुनिश्चित करना है।
5. कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियों को कम करना- रणनीति आतंकवाद और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियों की पहचान और उन्हें कम करने पर भी ध्यान केंद्रित करती है। इसके तहत समुदाय के सहयोग से कट्टरपंथ-विरोधी मॉड्यूल को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।
6. अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी प्रयासों में सहयोग- आतंकवाद एक वैश्विक चुनौती है। इसलिए ‘प्रहार’ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ चल रहे प्रयासों के साथ भारत के सहयोग और समन्वय को मजबूत करने पर भी जोर देता है।
7. समाज की सामूहिक सुरक्षा क्षमता बढ़ाना- रणनीति में समाज की भागीदारी और सामूहिक लचीलेपन यानी resilience को मजबूत करने पर जोर दिया गया है, ताकि आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ व्यापक सामाजिक प्रतिक्रिया विकसित की जा सके।
‘प्रहार’ का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत की आतंकवाद-रोधी व्यवस्था को reactive approach से proactive approach की ओर ले जाना है। इसके तहत आतंकवादी गतिविधि होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय खुफिया जानकारी और खतरे के संकेतों के आधार पर पहले से रोकथाम पर जोर दिया जाएगा।
आतंकवादी घटनाओं से निपटने के लिए राज्य एजेंसियों और पुलिस के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) जैसे विशेष केंद्रीय बलों के बीच तेज और समन्वित कमांड श्रृंखला को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। इससे गंभीर आतंकवादी घटनाओं की स्थिति में विभिन्न स्तरों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच प्रतिक्रिया को अधिक प्रभावी और समन्वित बनाने में मदद मिलेगी।
आतंकवाद को रोकने के साथ-साथ उसके वित्तीय नेटवर्क को खत्म करना भी ‘प्रहार’ रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार के अनुसार, रणनीति के तहत आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए क्रिप्टो वॉलेट की पहचान और निगरानी, डार्क वेब पर होने वाली क्राउडसोर्सिंग को रोकना, आतंकी फंडिंग से जुड़ी संपत्तियों को जब्त करना और केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई व अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से सीमा पार आतंकी फंडिंग नेटवर्क को रोकना जैसे उपायों पर ध्यान दिया जा रहा है।

यह प्रयास Financial Action Task Force (FATF) के मानकों के अनुरूप आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाने की व्यापक रणनीति से भी जुड़ा है। सबसे पहले संस्थागत और प्रणालीगत एकीकरण को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद विभिन्न स्तरों पर निगरानी और मूल्यांकन के माध्यम से रणनीति के परिणामों का आकलन किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य केवल नई व्यवस्था बनाना नहीं, बल्कि उसके प्रदर्शन की लगातार समीक्षा करके आवश्यक सुधार करना भी है।

गृह मंत्रालय के तत्वावधान में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) द्वारा आयोजित वार्षिक आतंकवाद विरोधी सम्मेलन (Anti-Terrorism Conference – ATC) भी इस रणनीति की समीक्षा और मजबूती का महत्वपूर्ण मंच है। इस सम्मेलन में कानून प्रवर्तन एजेंसियों, खुफिया संगठनों, सुरक्षा बलों, नीति निर्माताओं और कानूनी विशेषज्ञों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। सम्मेलन का उद्देश्य आतंकवाद विरोधी उपायों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना और बदलते सुरक्षा वातावरण के अनुसार रणनीति में सुधार करना है।
‘प्रहार’ नीति के जरिए केंद्र सरकार आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया को अधिक सक्रिय, खुफिया-आधारित, तकनीक-सक्षम और समन्वित बनाना चाहती है। साथ ही, नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कानून के शासन और मानवाधिकारों के सिद्धांतों का पालन भी महत्वपूर्ण रहेगा।

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Author: Ib News

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