Deepfake, AI Fraud और फर्जी वीडियो पर सरकार का शिकंजा, जानिए नए नियम
अरुण कुमार
नई दिल्ली: डीपफेक पर सरकार का बड़ा एक्शन: AI-जनित फर्जी कंटेंट पर 3 घंटे में हटाने का नियम, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सख्त जिम्मेदारी, केंद्र सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार होने वाले डीपफेक (Deepfake), फर्जी ऑडियो, वीडियो और टेक्स्ट सामग्री से पैदा हो रहे खतरों से निपटने के लिए व्यापक कानूनी और तकनीकी ढांचा लागू किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य नागरिकों के लिए खुला, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह साइबर स्पेस सुनिश्चित करना है।
यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में प्रस्तुत की। सरकार ने 10 फरवरी 2026 को सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 में संशोधन कर डीपफेक और AI-जनित कंटेंट पर नियंत्रण और सख्त कर दिया। नए नियमों के अनुसार अदालत या सरकार के आदेश मिलने के बाद 36 घंटे की जगह अब केवल 3 घंटे में गैरकानूनी सामग्री हटानी होगी। संवेदनशील शिकायतों के निपटारे की समयसीमा भी घटाई गई है और AI से तैयार सामग्री पर स्पष्ट लेबलिंग और मेटाडेटा अनिवार्य किया गया है ताकि उपयोगकर्ता आसानी से पहचान सकें कि सामग्री कृत्रिम रूप से बनाई गई है।
आईटी नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य मध्यस्थों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्लेटफॉर्म पर डीपफेक वीडियो, फर्जी ऑडियो, बिना सहमति के बनाए गए निजी वीडियो, बच्चों से जुड़ी यौन शोषण सामग्री और प्रतिरूपण (Impersonation) व भ्रामक एवं झूठी AI सामग्री का निर्माण, प्रसार और प्रचार न हो। यदि कोई प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन नहीं करता है तो उसे आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा समाप्त हो सकती है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार ने बताया कि डीपफेक से जुड़े मामलों में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 धारा 66C – पहचान की चोरी, धारा 66D – प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी और धारा 66E – निजता का उल्लंघन व धारा 67 एवं 67A – अश्लील सामग्री।
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023- धारा 319 – प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी, धारा 336 – फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार करना, धारा 353 – फर्जी सूचना एवं अफवाह फैलाना व धारा 111 – संगठित साइबर अपराध के तहत कार्रवाई की जा सकती है। भारत AI मिशन के तहत कई प्रतिष्ठित संस्थानों में डीपफेक डिटेक्शन तकनीक विकसित की जा रही है। इनमें IIT जोधपुर, IIT मद्रास व IIT खड़गपुर जहां रियल टाइम डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं।
यदि कोई व्यक्ति डीपफेक, साइबर फ्रॉड या फर्जी कंटेंट का शिकार होता है तो शिकायत कर सकता है-
National Cyber Crime Reporting Portal
https://cybercrime.gov.in साइबर हेल्पलाइन 1930
सरकार ने बताया कि नागरिक संदिग्ध वेबसाइट, सोशल मीडिया लिंक, व्हाट्सएप नंबर, टेलीग्राम हैंडल और डीपफेक सामग्री की भी रिपोर्ट कर सकते हैं।
सरकार नियमित रूप से Cyber Security Awareness Month, Safe Internet Day और Cyber Awareness Day व Swachhta Pakhwada जैसे अभियान चलाकर लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक कर रही है। सरकार का कहना है कि AI नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ उसका सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। डीपफेक और फर्जी सामग्री के खिलाफ सख्त नियम डिजिटल विश्वास को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम हैं।
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AI generated fake contents, news, videos etc. should be checked controlled & monitored.