हिमाचल में फिलहाल तीन एक्स-बैंड डॉप्लर रडार कार्यरत।
राज्य में 24 AWS, 66 ARG और 135 वर्षामापी स्टेशन सक्रिय।
AI और हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग से मौसम पूर्वानुमान होगा और सटीक।
अरुण कुमार
नई दिल्ली: हिमाचल के लाहौल-स्पीति में नहीं लग पाया डॉप्लर मौसम रडार, सरकार ने बताई वजह; मौसम निगरानी के लिए कई बड़े कदम, हिमाचल प्रदेश के संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र लाहौल एवं स्पीति घाटी में एक्स-बैंड डॉप्लर मौसम रडार (DWR) स्थापित करने की योजना तकनीकी कारणों से पूरी नहीं हो सकी। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) को राज्य सरकार और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग के बावजूद ऐसा उपयुक्त स्थान नहीं मिला, जहां रडार प्रभावी ढंग से कार्य कर सके।
पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि बीम अवरोध (Beam Blockage) के कारण मौसम रडार की कार्यक्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होती, इसलिए परियोजना की समय सीमा समाप्त होने के बाद प्रस्तावित रडार को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थापित कर दिया गया।

सरकार के अनुसार, लाहौल एवं स्पीति की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के कारण रडार की किरणों का मार्ग बाधित हो रहा था। ऐसी स्थिति में रडार द्वारा बादलों, वर्षा, तूफान और अन्य मौसमीय गतिविधियों की सटीक निगरानी संभव नहीं होती। इसी तकनीकी समस्या को देखते हुए परियोजना को उस स्थान पर लागू नहीं किया गया।
सरकार ने बताया कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में तीन कार्यरत एक्स-बैंड डॉप्लर मौसम रडार मौजूद हैं जिसमे कुफरी, जोत और मुरारी देवी, ये रडार राज्य में मौसम की निगरानी और पूर्वानुमान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य में मौसम की सटीक जानकारी जुटाने के लिए व्यापक नेटवर्क विकसित किया है जैसेकि 24 Automatic Weather Stations (AWS), 4 Agro Automatic Weather Stations और 66 Automatic Rain Gauge (ARG) व 135 अतिरिक्त वर्षामापी स्टेशन (जिला एवं ब्लॉक स्तर)।
सरकार के अनुसार लाहौल-स्पीति और किन्नौर में सक्रिय मौसम स्टेशन इन दोनों संवेदनशील जिलों में कुल 10 AWS एवं ARG स्टेशन कार्यरत हैं-इनमें प्रमुख केलांग, कुकुमशेर, ताबो, रेकोंग पिओ, कल्पा, सांगला, पूह, मूरंग, लियो और सुम्धो स्थान हैं।ये स्टेशन लगातार मौसम संबंधी आंकड़े जुटाकर पूर्वानुमान प्रणाली को मजबूत करते हैं।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने बताया कि देशभर विशेषकर पर्वतीय एवं दूरदराज क्षेत्रों में मौसम निगरानी को बेहतर बनाने के लिए कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है जैसेकि-हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC), हाई रिजॉल्यूशन Numerical Weather Prediction (NWP) मॉडल, Artificial Intelligence आधारित मौसम पूर्वानुमान, आधुनिक मौसम उपग्रह, Upper Air bservation System, Doppler Weather Radar Network और स्वचालित मौसम स्टेशन व स्वचालित वर्षामापी स्टेशन। इन आधुनिक प्रणालियों से भारी बारिश की बेहतर भविष्यवाणी, बादल फटने की घटनाओं पर निगरानी, बाढ़ एवं भूस्खलन की पूर्व चेतावनी, किसानों को मौसम आधारित सलाह और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को समय रहते अलर्ट तथा जान-माल के नुकसान में कमी जैसे महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि देशभर में विशेष रूप से संवेदनशील और पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम निगरानी नेटवर्क को लगातार मजबूत किया जा रहा है। भविष्य में तकनीकी व्यवहार्यता, संसाधनों की उपलब्धता और परिचालन आवश्यकताओं के आधार पर नई परियोजनाओं पर निर्णय लिया जाएगा।
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