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नई दिल्ली: 25 जून 1975: क्या था आपातकाल? क्यों लगाया गया था इमरजेंसी और भारतीय लोकतंत्र पर उसका क्या प्रभाव पड़ा?

25 जून 1975 का आपातकाल: क्या था इमरजेंसी, क्यों लगाया गया और भारतीय लोकतंत्र पर क्या पड़ा असर?

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🕯️ 25 जून 1975: भारतीय लोकतंत्र का सबसे चर्चित अध्याय

क्या था आपातकाल? क्यों लगाया गया? क्या हुए थे उसके प्रभाव?
और क्यों 25 जून को अब “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मनाया जाता है?

जानिए भारतीय इतिहास की उस घटना को जिसने लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों पर गहरी बहस छेड़ दी थी।

नोट: “संविधान हत्या दिवस” भारत सरकार द्वारा 11 जुलाई 2024 को घोषित आधिकारिक नाम है, जबकि आपातकाल को लेकर राजनीतिक दलों और इतिहासकारों के बीच अलग-अलग मत मौजूद हैं।

IB NEWS-विशेष रिपोर्ट

नई दिल्ली:25 जून 1975: क्या था आपातकाल? क्यों लगाया गया था इमरजेंसी और भारतीय लोकतंत्र पर उसका क्या प्रभाव पड़ा? भाजपा ने अपने सोशल मीडिया X पर एक वीडियो जारी करते हुये लिखा है “25 जून, 1975 — जब लोकतंत्र को कांग्रेस ने कुचला! देखिए, आपातकाल के उस दौर को याद करता ये वीडियो… #SamvidhanHatyaDiwas” 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे चर्चित और विवादास्पद तारीखों में से एक है। इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने देश में आंतरिक आपातकाल (Internal Emergency) की घोषणा की थी।

यह आपातकाल 21 महीनों तक, यानी मार्च 1977 तक लागू रहा। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं, प्रेस की आजादी और राजनीतिक गतिविधियों पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए।

क्या है आपातकाल?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत यदि युद्ध, बाहरी आक्रमण या आंतरिक अशांति से राष्ट्र की सुरक्षा को खतरा हो, तो राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं। 25 जून 1975 को “आंतरिक अशांति” (Internal Disturbance) के आधार पर देश में आपातकाल लागू किया गया था। बाद में 44वें संविधान संशोधन के जरिए “आंतरिक अशांति” शब्द को हटाकर “सशस्त्र विद्रोह” (Armed Rebellion) कर दिया गया।

आपातकाल लगाने के प्रमुख कारण क्या थे?
1. इलाहाबाद हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला- 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रायबरेली लोकसभा चुनाव में चुनावी अनियमितताओं के आरोपों पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया था और छह वर्षों तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी।
2. विपक्षी आंदोलन-जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में बिहार और गुजरात से शुरू हुआ जन आंदोलन पूरे देश में फैल चुका था। विपक्ष सरकार के इस्तीफे और व्यापक राजनीतिक सुधारों की मांग कर रहा था।
3. आर्थिक संकट-देश उस समय महंगाई, बेरोजगारी, तेल संकट और औद्योगिक अशांति जैसी समस्याओं से जूझ रहा था, जिससे जन असंतोष बढ़ रहा था।
4. सरकार का पक्ष-तत्कालीन सरकार ने तर्क दिया था कि देश में व्यवस्था बनाए रखने, विकास कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने और आंतरिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आपातकाल आवश्यक था।
आपातकाल के दौरान क्या हुआ?
प्रेस पर सेंसरशिप- समाचार पत्रों और मीडिया संस्थानों पर सरकारी सेंसरशिप लागू कर दी गई। कई अखबारों को प्रकाशन से पहले सरकारी स्वीकृति लेनी पड़ती थी।
विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियां- जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडिस, मोरारजी देसाई सहित हजारों राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
मौलिक अधिकारों पर असर- नागरिक स्वतंत्रताओं और संवैधानिक अधिकारों के प्रयोग पर गंभीर प्रतिबंध लगाए गए। न्यायपालिका और प्रशासन की भूमिका को लेकर भी व्यापक बहस हुई।
नसबंदी अभियान- आपातकाल के दौरान चलाए गए परिवार नियोजन कार्यक्रम, विशेषकर जबरन नसबंदी के आरोप, आज भी उस दौर के सबसे विवादास्पद अध्यायों में गिने जाते हैं।
1977 में क्या हुआ?

जनवरी 1977 में चुनाव कराने की घोषणा की गई। मार्च 1977 के आम चुनाव में जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और पहली बार केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। इंदिरा गांधी और कांग्रेस को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर नए सिरे से विमर्श शुरू हुआ।

संविधान हत्या दिवस- भारत सरकार ने 11 जुलाई 2024 को 25 जून को “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले नागरिकों और नेताओं को श्रद्धांजलि देना है।

दूसरी ओर, कांग्रेस और कुछ अन्य राजनीतिक दल इस निर्णय से असहमति व्यक्त करते हैं और इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रेरित बताते हैं।

इतिहास का महत्वपूर्ण सबक: आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अध्याय है। समर्थकों और आलोचकों के अलग-अलग दृष्टिकोणों के बावजूद, यह घटना लोकतांत्रिक संस्थाओं, नागरिक स्वतंत्रताओं और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के महत्व की याद दिलाती है। भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून 1975 एक ऐसी तारीख है, जिससे आने वाली पीढ़ियां लोकतंत्र, अधिकारों और संवैधानिक संतुलन के महत्व को समझती रहेंगी।

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Ib News
Author: Ib News

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