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भारत बनेगा जेनेरिक दवाओं के माध्यम से ‘विश्व की फार्मेसी’ -जेपी नड्डा 

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बायो-फार्मा शक्ति योजना और तीन समर्पित रासायनिक पार्कों के लिए 13,000 करोड़ रुपये का प्रावधान भारत के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है

भारत की वैश्विक रासायनिक क्षेत्र की हिस्सेदारी 2030 तक बढ़कर 5-6% हो जाएगी और 2040 तक इसका कारोबार 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा
बजट के बाद आयोजित वेबिनार समग्र सरकारी दृष्टिकोण का एक उदाहरण है :  केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने बायो-फार्मा शक्ति योजना और तीन समर्पित रासायनिक पार्कों के लिए 13,000 करोड़ रुपये के प्रावधान को भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है। यह घोषणा देश की आत्मनिर्भरता और रासायनिक क्षेत्र में क्रांति लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।बायो-फार्मा शक्ति योजना जैव प्रौद्योगिकी और फार्मास्यूटिकल्स को बढ़ावा देगी, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर बायो-मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा। तीन नए रासायनिक पार्क गुजरात, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे राज्यों में स्थापित होंगे, जो स्थानीय रोजगार और निर्यात को गति देंगे। इस निवेश से घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।

बजट के बाद आज ‘आर्थिक विकास को बनाए रखना और उसे सुदृढ़ करना’ विषय पर आयोजित वेबिनार पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण में इस बात का उल्लेख किया कि मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) विकसित भारत के लिए एक द्वार हैं और भारतीय उद्योग जगत के लिए वैश्विक स्तर पर विस्तार करने के नए अवसर प्रदान करते हैं। भारत जेनेरिक दवाओं के माध्यम से ‘विश्व की फार्मेसी’ बन गया है। 2035 तक वैश्विक स्तर पर 40% दवाएं जैविक होंगी। 2030 तक 300 अरब डॉलर मूल्य के पेटेंट समाप्त हो रहे हैं। अब जैविक औषधियों (बायोलॉजिक्स) की ओर बढ़ने का समय है और भारत बायोफार्मा मिशन के साथ इस चुनौती का सामना करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस मिशन के लिए अगले पांच वर्षों के लिए 10,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। वैश्विक बायोसिमिलर बाजार में 1% हिस्सेदारी भारत के लिए सालाना 2 लाख करोड़ रुपये के अवसर में तब्दील हो सकती है।

मंत्री ने आगे कहा कि प्रतिभा और कौशल विकास के साथ अधिक निकटता से जुड़कर एनआईपीईआर जैसी संस्थाओं को मजबूत करना आवश्यक है। देश भर में 1,000 नैदानिक परीक्षण स्थलों का विकास अनुसंधान क्षमता और नवाचार को बढ़ावा देगा। नड्डा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत के रसायन क्षेत्र का उत्पादन 19.4 लाख करोड़ रुपये का है और यह डाई और एग्रोकेमिकल्स जैसे क्षेत्रों में मजबूत है फिर भी वैश्विक स्तर पर इसकी हिस्सेदारी 3% ही है।

सामूहिक स्वामित्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए नड्डा ने कहा कि स्थायी आर्थिक विकास के लिए सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी और साझा जिम्मेदारी आवश्यक है। उन्होंने वेबिनार को ही इस दृष्टिकोण का एक जीवंत उदाहरण बताया, जो विभिन्न क्षेत्रों और संस्थानों में समन्वित प्रयासों को प्रदर्शित करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अलग-थलग प्रयासों से प्रगति हासिल नहीं की जा सकती है और मंत्रालयों, राज्यों और उद्योग जगत के बीच गहन सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने दिन भर चली चर्चाओं की सराहना की और इसे बजट 2026-27 की घोषणाओं को साकार करने की दिशा में एक सकारात्मक योगदान बताया।

बजट के बाद आयोजित वेबिनार उस शृंखला का दूसरा वेबिनार था जिसमें नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों, वित्तीय संस्थानों और संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया ताकि भारत की विकास गति को तेज करने और बजट 2026-27 की घोषणाओं के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जा सके।

13,000 करोड़ का यह प्रावधान रसायन उद्योग को मजबूत करेगा, जिसमें 5 लाख से अधिक नौकरियां सृजित होंगी। पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों पर जोर देकर सर्कुलर इकोनॉमी को प्रोत्साहन मिलेगा। नड्डा ने कहा कि यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का हिस्सा है, जो 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार करेगा।

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Ib News
Author: Ib News

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