अरुण कुमार
नई दिल्ली:
ICAR-CPRI: छिपी भूख से लड़ने में मददगार होगा बैंगनी आलू! कुफरी जामुनिया में विटामिन C, आयरन और जिंक, पर्याप्त भोजन करने के बावजूद शरीर में जरूरी विटामिन और खनिजों की कमी होना आज पोषण के क्षेत्र की बड़ी चुनौतियों में शामिल है। इसे ‘छिपी भूख’ (Hidden Hunger) कहा जाता है। इस चुनौती से निपटने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (ICAR-CPRI) ने पोषक तत्वों से भरपूर रंगीन आलू की किस्में विकसित की हैं। इनमें कुफरी नीलकंठ, कुफरी माणिक और कुफरी जामुनिया प्रमुख हैं।
इन किस्मों में प्राकृतिक रंगद्रव्य एंथोसायनिन और आयरन-जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं। खासतौर पर बैंगनी गूदे वाला कुफरी जामुनिया अपने पोषण गुणों, आकर्षक रंग और विभिन्न व्यंजनों में उपयोग की संभावनाओं के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है छिपी भूख और कैसे मददगार है बायोफोर्टिफिकेशन?
छिपी भूख की स्थिति तब पैदा होती है, जब किसी व्यक्ति को भोजन से पर्याप्त कैलोरी तो मिलती है, लेकिन उसके आहार में जरूरी विटामिन और खनिज पर्याप्त मात्रा में नहीं होते। इससे निपटने का एक तरीका जैव-संवर्धन यानी बायोफोर्टिफिकेशन है। इसमें पौधों के प्रजनन और चयन के जरिए फसलों की पोषण गुणवत्ता बेहतर बनाई जाती है, ताकि सामान्य भोजन के माध्यम से अधिक पोषक तत्व मिल सकें। पारंपरिक फूड फोर्टिफिकेशन में खाद्य प्रसंस्करण के दौरान पोषक तत्व जोड़े जाते हैं, जबकि बायोफोर्टिफिकेशन में फसल के विकास के दौरान ही उसकी पोषण संरचना बेहतर करने का प्रयास किया जाता है।
ICAR-CPRI की रंगीन आलू की तीन प्रमुख किस्में
- कुफरी नीलकंठ: वर्ष 2018 में जारी इस किस्म की पहचान बैंगनी छिलके और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से है। इसे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में खेती के लिए उपयुक्त बताया गया है।
- कुफरी माणिक: वर्ष 2021 में जारी इस किस्म के कंद गहरे लाल छिलके और पीले गूदे वाले होते हैं। इसमें एंथोसायनिन, आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।
- कुफरी जामुनिया: वर्ष 2024 में जारी इस किस्म के कंदों का छिलका और गूदा बैंगनी होता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इसमें विटामिन C, एंथोसायनिन और कैरोटीनॉयड की मात्रा अन्य दो रंगीन किस्मों की तुलना में अधिक है।
कुफरी जामुनिया: पोषण के साथ बेहतर उत्पादन की संभावना

कुफरी जामुनिया मध्यम अवधि में पकने वाली किस्म है। इसके पौधे मध्यम ऊंचाई के होते हैं और प्रत्येक पौधे से लगभग 10–12 मध्यम से बड़े कंद प्राप्त हो सकते हैं। कंद आयताकार होते हैं और इनमें उथली आंखें तथा भुरभुरी बनावट पाई जाती है।
अनुशंसित कृषि पद्धतियों के तहत इसकी उपज लगभग 32–35 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है। संस्थान के स्टेशन परीक्षणों में 90 दिनों के दौरान लगभग 49 टन प्रति हेक्टेयर उपज दर्ज होने का उल्लेख है। परीक्षणों में विपणन योग्य उपज कुल उत्पादन के करीब 90 प्रतिशत तक रही। इसकी मध्यम सुप्तावस्था और भंडारण के दौरान कम सड़न तथा वजन में अपेक्षाकृत कम कमी भी उपयोगी विशेषताएं बताई गई हैं।
बैंगनी आलू में कौन-कौन से पोषक तत्व?
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुफरी जामुनिया के गूदे में प्रति 100 ग्राम लगभग 42.75 मिलीग्राम विटामिन C, 161 माइक्रोग्राम कैरोटीनॉयड और 42.05 मिलीग्राम एंथोसायनिन पाया जाता है। इसके छिलके में एंथोसायनिन की मात्रा लगभग 80.66 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम बताई गई है।
दिए गए पोषण आंकड़ों में कुफरी जामुनिया के गूदे में जिंक लगभग 22.77 पीपीएम और आयरन 32.23 पीपीएम बताया गया है। सामान्य आलू की तुलना में इसके लिए प्रति 100 ग्राम विटामिन C 42.75 मिलीग्राम, जिंक 2.28 मिलीग्राम और आयरन 3.22 मिलीग्राम के आंकड़े दिए गए हैं। वास्तविक पोषण मात्रा किस्म, मिट्टी, खेती की परिस्थितियों और पकाने की विधि के अनुसार बदल सकती है।
सब्जी से लेकर स्नैक्स तक हो सकता है इस्तेमाल
बैंगनी रंग और भुरभुरी बनावट के कारण कुफरी जामुनिया का इस्तेमाल पारंपरिक व्यंजनों के साथ नए खाद्य उत्पादों में भी किया जा सकता है। इससे सब्जी, पराठा, पूरी, रायता, हलवा, उपमा, डोसा और इडली जैसे व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं। इसके अलावा आलू के आटे, सूप, बेकरी उत्पादों और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में भी इसकी संभावनाएं हैं।
पोषण सुरक्षा की दिशा में अहम कदम
कुफरी जामुनिया जैसी रंगीन आलू की किस्में किसानों के लिए नई संभावनाएं और उपभोक्ताओं के लिए आहार में विविधता बढ़ाने का अवसर दे सकती हैं। उत्तर भारतीय मैदानी क्षेत्रों में इसकी खेती की सिफारिश की गई है। हालांकि, छिपी भूख से निपटने के लिए केवल एक फसल पर्याप्त नहीं है। संतुलित और विविध आहार, जन-जागरूकता तथा पोषण तक बेहतर पहुंच भी जरूरी हैं।
बेहतर पोषण गुणवत्ता और कृषि उपयोगिता का संयोजन रंगीन आलू को भविष्य की पोषण सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प बना सकता है।
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