नई दिल्ली
Delhi protest: दिल्ली में प्रदर्शन और बंदी से श्रमिकों के रोजगार पर संकट, BMS ने की राहत पैकेज की मांग, भारतीय मजदूर संघ दिल्ली प्रदेश के महामंत्री डॉ. दीपेन्द्र चाहर ने आज कहा कि राजधानी में प्रदर्शनों के कारण कनॉट प्लेस, जनपथ, पालिका बाजार, सदर बाजार का बंद रहना, 45 मेट्रो स्टेशनों का बंद होना और जगह-जगह डायवर्जन लगना सीधे-सीधे असंगठित क्षेत्र के श्रमिक के पेट पर लात है।
डॉ. चाहर ने कहा कि दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार एक दिन में 2000 करोड़ और नौ दिनों में 5000 करोड़ से अधिक का व्यापार प्रभावित हुआ है। यह आंकड़ा बड़े व्यापारियों का है। इसके पीछे का सच यह है कि कनॉट प्लेस के होटलों में काम करने वाला वेटर, दुकानों में काम करने वाला सेल्समैन, रेहड़ी-पटरी वाला, ऑटो-टैक्सी चालक, डिलीवरी बॉय, घरों में काम करने वाली बहनें और दिहाड़ी मजदूर पिछले कई दिनों से बेरोजगार बैठा है। नवरात्र, रामलीला और दीपावली से ठीक पहले यही वह समय है जब वह साल भर के लिए कुछ बचत करता है, अपने घर पैसा भेजता है, बच्चों के लिए कपड़े खरीदता है। व्यापार बंद है तो काम बंद है, काम बंद है तो मजदूरी बंद है।

उन्होंने कहा कि भारतीय मजदूर संघ शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार का सम्मान करता है, लेकिन विरोध के नाम पर अराजकता का समर्थन नहीं करता। 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर अनुमति के बाद हुई हिंसा और 8 घंटे की अराजकता का अनुभव दिल्ली के सामने है। इसलिए दिल्ली पुलिस और प्रशासन द्वारा इस बार अनुमति न देना और निवारक कार्रवाई करना कानून-व्यवस्था की दृष्टि से समझा जा सकता है। हमें यह भी चिंता है कि भीड़ की आड़ में दुकानों में लूटपाट न हो, श्रमिक बस्तियों में अशांति न फैले।
लेकिन सवाल यह है कि इस पूरी कवायद की कीमत हमेशा श्रमिक ही क्यों चुकाए ? मेट्रो बंद, बसों के रूट बदले, इंटरनेट बंद, 15-20 किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर कर्मचारी समय पर ड्यूटी नहीं पहुंच पा रहा है। कई जगह वेतन कट रहा है। एम्बुलेंस तक जाम में फंसी है। यह स्थिति राष्ट्र हित में नहीं है, उद्योग हित में नहीं है और श्रमिक हित में तो बिल्कुल नहीं है।
भारतीय मजदूर संघ दिल्ली प्रदेश की मांग है :
- जंतर-मंतर जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्र, जहां संसद, राष्ट्रपति भवन, मंत्रालय और बड़े व्यापारिक केंद्र हैं, वहां से स्थायी प्रदर्शन स्थल को अन्यत्र उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।
- त्योहारी सीजन में बंदी से प्रभावित असंगठित श्रमिकों, रेहड़ी-पटरी वालों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए दिल्ली सरकार विशेष राहत और रोजगार की घोषणा करे।
- विरोध प्रदर्शन के दौरान मेट्रो, बस और आवश्यक परिवहन को पूरी तरह बंद करने के बजाय वैकल्पिक सुरक्षित रूट से संचालित किया जाए ताकि कर्मचारी कार्यस्थल तक पहुंच सके।
- डिजिटल माध्यम से फैलाए जा रहे भ्रामक वीडियो पर सख्त कार्रवाई हो, क्योंकि इससे भी बाजार में दहशत फैलती है और श्रमिक काम पर जाने से डरता है।
डॉ. चाहर ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा देश का निर्माण करे, विनाश नहीं। महामंत्री डॉ दीपेंद्र चाहर ने कहा है कि युवा ऊर्जा संकीर्ण स्वार्थ की भेंट न चढ़े। हम युवाओं से अपील करते हैं कि वे श्रमिकों के रोजगार को बंधक बनाकर कोई आंदोलन न करें।
भारतीय मजदूर संघ का मंत्र है – राष्ट्र हित, उद्योग हित, श्रमिक हित। हम दिल्ली पुलिस के शांति प्रयासों का समर्थन करते हुए दिल्ली सरकार और भारत सरकार से मांग करते हैं कि वह श्रमिकों के हित में तत्काल हस्तक्षेप करे।
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